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संस्कृति की जड़ों को मजबूत करने का सशक्त माध्यम है गीता : जयराम ठाकुर

संस्कृति की जड़ों को मजबूत करने का सशक्त माध्यम है गीता : जयराम ठाकुर
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  • बोले, कोरोना से वैश्विक स्थिति बिगड़ी, लेकिन मूल संस्कृति से हुआ जुड़ाव
  • ज्ञान और जीवन कल्याण का ग्रंथ है गीता, जीवन को अध्यात्म-चिंतन के साथ जोड़ता है

चंडीगढ़ । एक्शन इंडिया न्यूज़

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि श्रीमद्भागवत गीता संस्कृति की जड़ों को मजबूत करने का सबसे सशक्त माध्यम है। गीता ज्ञान और जीवन कल्याण का ग्रंथ है, जिसके जरिये जीवन को व्यवहारिक बनाया जा सकता है। गीता में जीवन जीने की शैली से लेकर कर्म करने और धर्म पर चलने के तमाम रास्ते हैं, जिनके जरिये मानव अपने जीवन को अध्यात्म व चिंतन के साथ जोड़ सकता है। गीता का अध्यात्मिक अध्ययन किया जा सकता है।

जयराम ठाकुर सोमवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के श्रीमद्भागवत गीता सभागार में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में सतत अस्तित्व एवं श्रीमद्भगवद गीता विषय पर आयोजित 5वीं अंतरराष्ट्रीय विचार गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले उन्होंने ब्रह्मसरोवर में मंत्रोच्चारण और शंखनाद के बीच अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव की शुरूआत की।

हिमाचल के मुख्यमंत्री ने कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना ने जिस तरह अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा, उसका एक पक्ष यह भी रहा कि अपनी मूल संस्कृति को त्याग चुके लोगों का दोबारा जुड़ाव हआ। यानि जो लोग गांव जोड़ चुके थे, उनका दोबारा गांवों में आगमन हुआ और वे अपनी माटी से जुड़े। उन्होंने आह्वान किया कि अपनी मूल संस्कृति को कभी भी मत छोड़ो, इससे जुड़ाव मजबूती के साथ रखो। आधुनिकता की भागदौड़ में परिवार केवल कागजों में सिमटा हुआ था, लेकिन लॉकडाउन में सभी लोग अब एक छत के नीचे एकत्रित हुए तब असल में परिवार बना। इसलिए कर्म करो, लेकिन उसके परिणाम की चिंता न करें। परिणाम की चिंता करना घातक हो सकता है, जिससे पूरी दुनिया देख चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कि गीता एक धर्म का ग्रंथ नहीं है, बल्कि पूरे विश्व के लिए ज्ञान और कल्याण का ग्रंथ है, जिसमें जीवन जीने की कला से लेकर कर्म करने का संदेश निहित है। आधुनिकता की भागदौड़ में एक दूसरे को पीछे जोड़ने की होड़ लगी हुई है, लेकिन इस भागदौड़ में संस्कार पीछे छुट गए हैं, इन संस्कारों को साथ लेकर चलने से ही टेक्नालॉजी की सार्थकता साबित होगी। कोरोना वायरस से पीछे छूटी संस्कृति के साथ जुड़ने का अवसर दिया है, जिसे खोना नहीं है।

पत्रकारों से बातचीत में जयराम ठाकुर ने कहा कि पवित्र ग्रंथ गीता के संदेश आज भी पूरे विश्व के लिए प्रासंगिक और तर्कसंगत है। इस पवित्र और पावन धरा कुरुक्षेत्र पर भगवान श्रीकृष्ण ने सदियों पहले गीता के उपदेश देकर पूरे विश्व को कर्म करने का संदेश दिया। आज पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेशों को अपने जीवन में धारण करने की जरुरत है। इस भूमि पर हरियाणा सरकार व कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की तरफ से हर वर्ष आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव से धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की पहचान पूरे विश्व में बनी है।

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