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कहानी एक और आशा की जिसने कराया गरीब महिला का सुरक्षित प्रसव

कहानी एक और आशा की जिसने कराया गरीब महिला का सुरक्षित प्रसव
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  • पहले से एक बेटी की मां ने सिजेरियन से दिया बेटे को जन्म, परिवार की खुशी का नहीं ठिकाना

  • लॉकडाउन के चलते परेशान महिला के परिजनों ने मांगी थी मदद, नहीं की थी सहयाेग में देरी

गाजियाबाद । एएनएन (Action News Network)

यूं तो आशा और आशा संगिनी का काम ऐसा है कि आए दिन लाेगों की मदद करने मौका मिलता है लेकिन कुछ वाकये ऐसे हो जाते हैं जो लंबे समय तक याद रहते हैं। मुरादनगर ब्लॉक में आशा संगिनी रजनी के साथ भी ऐसे ही एक वाकया सामने आया जिसे वह भूल नहीं सकेंगी और उनके समाज सेवा के जज्बे को बढ़ाता रहेगा। रजनी बताती हैं कि बताया कोविड-19 संक्रमण के चलते कहीं न कहीं स्वास्थ्य विभाग की सेवाएं भी प्रभावित हुई थीं। इसके साथ ही निजी अस्पतालों ने भी मरीज देखने में आनाकानी शुरू कर दी। प्रसव के मामलों में लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ा, क्योंकि सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं ही एकमात्र विकल्प रह गई थीं।

वह बताती हैं कि एक गरीब परिवार से फोन आया। दीदी मेरी पत्नी प्रसव पीड़ा से कराह रही है। निजी अस्पताल में ले जाने की हमारी हैसियत नहीं है। क्या करें? आप ही हमारी कुछ मदद कर सकती हो। रजनी ने फोन सुना और मदद करने के लिए आतुर हो उठी। अपने ब्लॉक कम्यूनिटी प्रोसेस मैनेजर (बीसीपीएम) को पूरी बात बताई। उनके बताए अनुसार रजनी ने खुद कॉल करके एंबुलेंस-102 बुलाई और प्रसव पीड़ा से कराह रही महिला को लेकर संजय नगर स्थित संयुक्त जिला अस्पताल पहुंची। जहां गायनोलॉजिस्ट ने महिला की जांच की और जरूरत के हिसाब से सीजर की तैयारी शुरू कर दी। पहले से एक बेटी की मां ने सिजेरियन डिलीवरी से इस बार बेटे को जन्म दिया। परिवार पूरा हो गया।

घर में सबकी खुशी का ठिकाना न रहा। रजनी बताती हैं कि पूरा परिवार उनका शुक्रगुजार है और वह खुद भी उस दिन को याद करके अपने पेशे पर गर्व का अनुभव करती हैं। विपरीत परिस्थितियों में जरूरतमंद की मदद का आनंद ही कुछ और है। रजनी बताती हैं कोरोना संक्रमण से गांव वालों को सतर्क करना बड़ी जिम्मेदारी का अहसास दिलाता है। सन् 2006 में बतौर आशा के रूप में ज्वाइन करने वाली रजनी सन् 2014 में संगिनी बन गईं। अब मुरादनगर ब्लॉक के चार गांव पुरपुर्सी, असालतनगर, ढेडा और सैंतली गांव की जिम्मेदारी उनके पास है।

इन गांवों में तैनात 22 आशाओं के जरिए वह घर-घर तक स्वास्थ्य विभाग की योजनाएं पहुंचा रही हैं और लोगों को स्वास्थ्य के बारे में जागरूक कर रही हैं। कोविड स्क्रीनिंग के दौरान जरूरत पड़ने पर गांव के प्रधान की मदद लेती हैं और खुद भी आशा के साथ जाकर घर-घर संक्रमण से बचाव के बारे में जागरूक कर रही हैं और साथ ही घर र एकांतवास में किन-किन बातों का पालन करना है, समझा रही हैं।

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