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हिमाचल प्रदेश

एबीवीपी ने बिरसा मुंडा को याद किया

एबीवीपी ने बिरसा मुंडा को याद किया
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शिमला। एक्शन इंडिया न्यूज़


अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने बिरसा मुंडा को याद करते हुए मंगलवार को जनजातीय गौरव दिवस के उपलक्ष्य पर संस्कृति कार्यक्रम उलगुलान का आयोजन किया। कार्यक्रम के अध्यक्ष के जनक राम ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के भिन्न-भिन्न जनजातीय समुदाय रहते हैं। इनका भारत के इतिहास में अहम भूमिका है।

इस मौके पर गेशे थुप्तन ज्ञलछन नेगी ( रिनपोछे) ने कहा कि भारत के लोगों के पूर्वज एक ही हैं। भारत के सभी जनजातीय समुदायों के पूर्वज एक ही हैं। हमें अलग न होकर अपने इतिहास को समझ कर बिना भेदभाव के एकता के सूत्र में बंधना चाहिए।


कार्यक्रम विशिष्ठ अतिथि डॉ. सुरेन्द्र शर्मा ने कहा कि विद्यार्थी परिषद शुरू से जनजातीय समाज को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है। दुर्भाग्यवश कुछ ताकतें ऐसी भी हैं जो जनजातियों को बेवश, लाचार, गरीब पिछड़ा बताने का प्रयत्न करती हैं और जनजाति समुदायों को भटकाने का प्रयास किया जाता है ।


उन्होंने कहा कि हमें जड़ों से जुड़े रहना चाहिए। जनजातीय लोग सीधे सादे ईमानदार और शौर्यवान होते हैं। अगर कोई ईमानदारी का गलत फायदा उठाने की कोशिश करता है तो बिरसा मुंडा जैसे शौर्यवान भी होते हैं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर चन्द्र मोहन परशिरा ने कहा कि अंग्रेजों ने भारतीयों के साथ अत्याचार किया और अनेक षड्यंत्रों की सहायता से भारतीय वास्तविकता को खत्म करने की कोशिश की। ईसाई मिशनरियों का प्रयोग कर छोटा नागपुर में मुंडाओं को यह बता कर भटकाना शुरू कर दिया था कि अगर आप ईसाई बन जाओ तो जंगल और आपके अधिकारों को पूरा किया जाएगा। मुंडा ने आदिवासियों को वापस अपने मूल धर्म में परिवर्तित कर दिया। बालक बिरसा मुंडा ने अपने देवी-देवताओं, परम्परा पर आघात देख कर अंग्रेजों की खिलाफत के लिए आदिवासी सशक्त क्रांति उलगुलान की शुरुआत की। उन्होंने युवाओं को ऐसे सेनानियों को पढ़ने को कहा।

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