अन्य राज्यमध्य प्रदेश

ऐतिहासिक कुर्की: PWD ऑफिस से SDO की गाड़ी, मेज, कुर्सी, पंखे तक कुर्क, बकाया न चुकाने पर भवन भी होगा कुर्क

गुना 
गुना के लोक निर्माण विभाग (PWD) कार्यालय में  वह नजारा देखने को मिला जो सरकारी सिस्टम की लापरवाही पर एक करारा तमाचा है। 30 साल लंबी कानूनी जंग के बाद, जब विभाग ने अपने ही एक रिटायर्ड कर्मचारी का हक देने में आनाकानी की, तो कोर्ट का डंडा ऐसा चला कि दफ्तर की रौनक ही गायब हो गई। आलम यह था कि जिस दफ्तर में बैठकर अधिकारी फाइलों पर कुंडलियां मारकर बैठे थे, वहां से न्यायालय की टीम साहब की कार, कंप्यूटर, कुर्सियां और यहां तक कि छत पर टंगे पंखे भी उतारकर ले गई। रिटायर्ड एलडीसी कौशल किशोर राठौर की इस जीत ने यह साफ कर दिया कि न्याय की चक्की भले ही धीरे चलती है, लेकिन जब चलती है तो बड़े-बड़े विभागों की अकड़ पीसकर रख देती है।

1995 से शुरु हुआ था न्याय के लिए कौशल किशोर राठौर संघर्ष

इस पूरी कहानी की शुरुआत साल 1995 में हुई थी, जब कौशल किशोर राठौर ने अपने पद के अनुरूप वेतन न मिलने पर अदालत का दरवाजा खटखटाया था। लोअर कोर्ट से लेकर देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट तक, राठौर ने हर मोर्चे पर जीत हासिल की। हालांकि विभाग ने 2013 तक के एरियर का भुगतान तो कर दिया, लेकिन 2014 से उनके रिटायरमेंट (30 दिसंबर 2025) तक का लगभग 40 लाख का भुगतान लटकाए रखा।

बार-बार गुहार लगाने के बाद भी विभाग की नींद नहीं खुली, तो राठौर ने 2018 में कोर्ट में 'इजरा' (वसूली याचिका) और फिर हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर दी। आखिरकार हाई कोर्ट के कड़े रुख के बाद जिला न्यायालय ने 36.68 लाख रुपये की वसूली के लिए कुर्की का वारंट जारी कर दिया।
दफ्तर की मेजें, कुर्सियां, कंप्यूटर सब कुर्क

दोपहर जब जिला नाजिर राकेश शर्मा के नेतृत्व में कोर्ट की टीम PWD कार्यालय पहुंची, तो वहां हड़कंप मच गया। कर्मचारी और अधिकारी कुछ समझ पाते, उससे पहले ही टीम ने चल संपत्ति को जब्त करना शुरू कर दिया। दफ्तर की मेजें, कुर्सियां और कंप्यूटर एक-एक कर बाहर निकाले जाने लगे। सबसे ज्यादा चर्चा SDO की गाड़ी की रही, जिसे टीम ने मौके पर ही कुर्क कर लिया।

कार्रवाई पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी

अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि यह तो सिर्फ शुरुआत है, यदि जब्त किए गए सामान से वसूली की पूरी राशि (36.68 लाख रुपये) नहीं निकलती है, तो विभाग की जमीन और पूरी बिल्डिंग को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। 30 साल के संघर्ष के बाद मिली यह जीत आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button