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बुन्देलखंड में एतिहासिक धरोहरें अब आयी बदहाली के मुहाने

बुन्देलखंड में एतिहासिक धरोहरें अब आयी बदहाली के मुहाने
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  • पर्वतमालाओं से घिरी तमाम सुन्दर झील और सरोवरों पर भी मंडराया संकट

  • सौ से अधिक श्रंखला में बने प्राचीन मंदिरों की अद्भुत नक्काशी भी बेमिसाल

महोबा। एएनएन (Action News Network)

उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में बुन्देली कश्मीर के नाम से विख्यात चरखारी क्षेत्र अब बदहाली के मुहाने आ गया है। सुरम्य पर्वतमालाओं और सुन्दर झीलों के साथ यहां एक सौ आठ श्रीकृष्ण के बने मंदिर के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा गये है। इसे विकसित करने की योजनायें भी बेमानी साबित हुयी है।

जिले का चरखारी नगर पर्वतमालाओं से घिरा है। यहां नयनाभिराम झीलों और श्रीकृष्ण के एक सौ आठ मंदिर बने है जिनका इतिहास हजारों साल पुराना है। वर्ष 1950 के नगर पालिका के रिकार्ड के मुताबिक चरखारी नगर की आबादी 50 हजार थी जो अब मौजूदा में यहां की आबादी 29 हजार रह गयी है।

किसी जमाने में यह नगर महानगरों की श्रेणी में गिना जाता था लेकिन आजादी के बाद से चरखारी की राजनैतिक और प्रशासनिक स्तर पर हुई लगातार उपेक्षा के कारण अब यह नगर छोटा सा कस्बा बनकर रह गया है। यहां कई एतिहासिक दुर्ग और किले है जो अब बदहाली के मुहाने आ गये है। स्थानीय स्तर पर भी इन धरोहरों के लिये कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है।

क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी झांसी डा. एस.के. दुबे ने गुरुवार को दोपहर बताया कि चरखारी क्षेत्र में काफी समय पूर्व सर्वे कराया गया था। कुछ मंदिर और धरोहरें पुरातत्व के दायरे में देखी गयी थी। उन्हें संरक्षित करने के लिये कार्यवाही भी समय-समय पर की गयी है। उन्होंने बताया कि चरखारी क्षेत्र पर्यटन के लिहाज से बहुत ही खूबसूरत है। यहां पर्वतमालायें और प्राचीन मंदिरों की छटा भी मनोरम है। फिलहाल इस क्षेत्र में पुरातत्व के दायरे में यदि कोई धरोहरें होगी तो उनका सर्वे कराया जायेगा।

1765 में चरखारी में मंगल दुर्ग की रखी गई थी नींव

चरखारी में मंगल दुर्ग की नींव, वर्ष 1765 में बुन्देलखण्ड राज्य के संस्थापक महाराज छत्रसाल के पुत्र महाराज जगतराज ने रखी थी। इस दुर्ग का निर्माण दो सालों में पूरा कराया गया था। यहां के लगभग सभी राजाओं ने अपने शासनकाल में श्रीकृष्ण मंदिर एवं तालाबों का निर्माण कराया था।

महाराज रतन सिंह ने अपने शासनकाल में रतन सागर तालाब का निर्माण कराया था वहीं महाराज विजय बहादुर ने विजय सागर, जय सिंह ने जय सागर व महाराज गंगा सिंह ने गंगा सागर का निर्माण कराया था। वर्ष 1983 में महाराज मलखान सिंह जूदेव ने एतिहासिक गोवर्धन नाथ जू मेले की शुरुआत की थी। 1911 में मनोरंजन के लिये थिएटर हाल बनवाया गया था जहां देश के नामीगिरामी कलाकार आगा खां सहित कई लोगों ने अपनी उम्दा कलाकारी यहां पेश की थी।

बुंदेलखंड के केसों की चरखारी में होती थी सुनवाई

वर्ष 1930 में चरखारी स्टेट का खुद पावरहाउस होता था। और तो और स्टेट का स्वयं का हाईकोर्ट भी यहीं था जहां समूचे बुन्देलखण्ड के केसों की सुनायी होती थी। अंग्रेजी हुकूमत ने दिये गये मृत्युदण्ड की सदा भी यहां के राजा को माफ करने का अधिकार दिया था। यहां के इतिहासकार डा.भवानीदीन ने बताया कि अंग्रेजी हुकूमत के बाद चरखारी का जिस तरह से विकास होना चाहिये वह नहीं हुआ।

1920 में बालिका एवं बालक इण्टरकालेज संचालित किया गया जहां बुन्देलखण्ड के विद्यार्थी पढऩे आते थे। उस समय चरखारी बुन्देलखण्ड के शिक्षा की केन्द्र बन चुकी थी। आजादी के बाद देश तेजी से आगे बढ़ा लेकिन चरखारी धीरे-धीरे अपनी चमक व सुन्दरता खोता गया। यहां एक-एक कर एतिहासिक धरोहरें भी बदहाल हो रही है।

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