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काशी में होली की धूम, पांडेयपुर में गोहरी की होलिका बनी आकर्षण का केन्द्र

काशी में होली की धूम, पांडेयपुर में गोहरी की होलिका बनी आकर्षण का केन्द्र
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वाराणसी। एएनएन (Action News Network)

धर्म नगरी काशी में रंगों के पर्व होली की मस्ती फिजाओं में बिखरने लगी है। पर्व पर जहां लोग घरेलू सामान के साथ परिवार और बच्चों के लिए कपड़ों, जूते,चिप्स,पापड़,गुझिया के खरीददारी में जुटे हैं। वहीं युवा होलिका का आकार बढ़ाने के लिए चंदा उगाही में जुट गये हैं। पर्व पर जिले में जगह-जगह होलिका के साथ उसमें होलिका की प्रतिमा भी रखी है।

पांडेयपुर चौराहे के समीप गोहरी की होलिका लोगों में आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है। होलिका को दस हजार उपलों से सजाया जा रहा है। रविवार को क्षेत्रीय युवा अजय जायसवाल,विकास ने बताया कि पर्यावरण सरंक्षण के लिए उपली (गोहरी) की होलिका इस बार जलाई जा रही है।

यहां प्रतिवर्ष होलिका में कुछ नया करने का प्रयास होता है। उन्होंने बताया कि सोमवार को रात्रि 11 बजे के बाद यहां होलिका का दहन होगा। इस वर्ष होलिका दहन में खास बात यह है कि शहर में विभिन्न स्थानों पर जहां होली सजाई गई है। उसमें कई जगहों पर होलिका की मूर्ति रखी गई है जिसके गोद में भक्त प्रहलाद भी बैठे हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार होलिका हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप नामक योद्धा की बहन और प्रह्लाद नामक विष्णु भक्त की बुआ थी। इनका जन्म जनपद- कासगंज के सोरों शूकरक्षेत्र नामक पवित्र स्थान पर हुआ था। उसको यह वरदान प्राप्त था कि वह आग में नहीं जलेगी।

इस वरदान का लाभ उठाने के लिए विष्णु-विरोधी हिरण्यकश्यप ने उसे आज्ञा दी कि वह प्रह्लाद को लेकर अग्नि में प्रवेश कर जाए, जिससे प्रह्लाद की मृत्यु हो जाए। होलिका ने प्रह्लाद को लेकर अग्नि में प्रवेश किया। ईश्वर कृपा से प्रह्लाद बच गये और होलिका जल गई। होलिका के अंत की खुशी में होली का उत्सव मनाया जाता है।

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