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छात्र हैं साहब कब तक सहन करेंगे - कुलिन्दर सिंह यादव

छात्र हैं साहब कब तक सहन करेंगे - कुलिन्दर सिंह यादव
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नई दिल्ली । Action India News

कोविड-19 के चलते पूरे विश्व में त्राहि-त्राहि मची हुई है | सभी देश अपनी अर्थव्यवस्था को इस संकट से उबारने में लगे हुए हैं | भारत सरकार द्वारा भी लगातार आर्थिक पैकेज की घोषणा की जा रही है, जिससे प्रभावित वर्गों को इस संकट से निकाला जा सके |

कोविड-19 चलते पिछले 5 महीनों से शिक्षण व्यवस्था पर भी विराम लगा हुआ है, हालांकि कुछ क्षेत्रों में ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से शैक्षणिक व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने का प्रयास किया जा रहा है | भारत जैसे देश में जहां बेरोजगारों की संख्या पहले से ही करोड़ों में है |

ऐसे में कोविड-19 से लाखों लोगों की नौकरियां छिन जाने के बाद इस संख्या में इजाफा हुआ है | अब मौजूदा समय में भारत की स्थिति बेरोजगारों के मामले में भयावह हो चुकी है | हालांकि विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा इस दौरान लाखों लोगों को रोजगार देने का खोखला दावा भी किया जा रहा है | जबकि वास्तविकता यह है कि देश की प्रतिष्ठित कंपनियां अगले छह महीनों तक नए रोजगार देने में सक्षम नहीं है |

भारत में केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के द्वारा लगातार छात्रों को मूर्ख बनाए जाने का प्रयास किया जा रहा है | इन सरकारों द्वारा नए पद को भरने की घोषणा तो कर दी जाती है, छात्रों से आवेदन भी मंगा लिए जाते हैं लेकिन वर्षों बाद भी परीक्षा संचालित नहीं हो पाती है |

उदाहरण के रूप में यदि हम बात करें तो रेलवे ने 1 मार्च 2019 को 35 हजार रिक्तियों के साथ एक आवेदन निकाला था | इसी के तुरंत बाद 12 मार्च को एक और पद के लिए भारतीय रेलवे ने विज्ञापन दिया जिसमें रिक्त पदों की संख्या एक लाख से भी ज्यादा थी |

इस तरह से जब भी कोई आवेदन मांगा जाता है, छात्र-छात्राओं के मध्य एक नया जोश, उत्पन्न होता है, यह होना भी चाहिए क्योंकि प्रतियोगी छात्र वर्षों लगे रहकर तैयारी करते हैं और इस तरह के मौकों की तलाश में रहते हैं | लेकिन इसके बाद ही खेल शुरू हो जाता है, जब दो करोड़ से ज्यादा छात्र-छात्राओं ने दोनों फार्मो के लिए आवेदन किया | आप इससे भारत में बेरोजगारी का अंदाजा लगा सकते हैं, जब 1 लाख 35 हजार पदों के लिए 2 करोड़ से ज्यादा आवेदन प्राप्त होते हैं |

आवेदन के बाद केंद्र सरकार द्वारा बताया गया कि सितंबर माह में इस परीक्षा को संपन्न कराया जाएगा | लेकिन लगभग 1 वर्ष से ज्यादा बीत जाने के बाद भी अभी तक केंद्र सरकार इस मुद्दे पर मौन है | केंद्र सरकार का कहना है कि कोई भी वेंडर हमें नहीं मिल रहा है, जो इस परीक्षा को संचालित करा सके |

आप खुद सोचिए भारत जैसे देश में जहां एक दिन में धारा 370 हटाई जा सकती है | विभिन्न विवादास्पद कानूनों को एक घंटे में संसद के द्वारा समाप्त किया जा सकता है | ऐसे में यदि भारत सरकार किसी परीक्षा को आयोजित कराने के लिए दृढ़ संकल्पित हो तो क्या वेंडर नहीं मिलेंगे ? यह सिर्फ खोखली बातें हैं |

भारत सरकार ने इस परीक्षा के आवेदन फार्म के माध्यम से लगभग दस हजार करोड रूपए इकट्ठे किए हैं | जब आपको वेंडर नहीं मिल रहे हैं, तब आपने इतनी भारी राशि को अपने अधीन 1 वर्षों तक क्यों रखा ? आप उसको छात्रों को वापस लौटा भी सकते हैं | सरकार को यह समझना चाहिए कि जिनके पैसे उन्होंने अपने पास रखे हैं वह उद्योगपतियों के बेटे नहीं हैं | यह देश का गरीब तबका है उसके साथ इस तरह का अन्याय नहीं होना चाहिए |

यह कोई पहला ऐसा मामला नहीं है, ऐसे अनगिनत मामले हैं जहां पर आवेदन के माध्यम से राशि को इकट्ठा किया जाता है और अंत में परीक्षा ही नहीं कराई जाती | विभिन्न आयोगों में चल रहे इस खेल को अब रोकना होगा |

इस तरह का खिलवाड़ यदि छात्रों के साथ हो रहा है तो निश्चित तौर पर शर्मनाक है | इस तरह के मामलों में जवाबदेही तय ना होने के कारण ऐसे बड़े-बड़े खेल होते रहते हैं | लेकिन हमारे जिम्मेदार राजनेताओं को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है | इस तरह का अन्याय जब प्रतियोगी छात्रों के साथ होता है, तो उनका मनोबल कम होता है |

प्रतियोगी छात्र-छात्राओं की आत्महत्या की घटनाओं में परीक्षा में लेटलतीफी, पेपर का आउट हो जाना, परिणाम में अनियमितता एक महत्वपूर्ण कारण है | भारत सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारों को भी छात्रों की इन मुद्दों को गंभीरता से लेना चाहिए | लेकिन हमारे यहां समस्या यह देखने को मिलती है कि जब चुनाव नजदीक होते हैं, तभी राजनेताओं को छात्रों की चिंताएं दिखाई देती हैं और आनन-फानन में कई सारी नियुक्तियों की घोषणा भी कर दी जाती है |

लेकिन चुनाव के संपन्न होने के बाद यह सिर्फ आंकड़ों में सिमट कर रह जाती हैं | यदि इसी तरह से प्रतियोगी छात्रों के साथ अन्याय होता रहा तो निश्चित तौर पर करोड़ों की संख्या में छात्र आंदोलन के लिए विवश होंगे, क्योंकि सहनशीलता की एक सीमा होती है जो अब छात्रों के बीच समाप्त होती नजर आ रही है |

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