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लाॅकडाउन के चलते संैकड़ों उज्जवल योजना वाले उपभोक्ता गैस एजेंसी पहुंचे

लाॅकडाउन के चलते संैकड़ों उज्जवल योजना वाले उपभोक्ता गैस एजेंसी पहुंचे
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कठुआ। एएनएन (Action News Network)

लॉकडाउन के 11 में दिन कठुआ में ज्यादातर लोग अपने घरों में रहे, लेकिन जैसे ही केंद्र सरकार द्वारा उज्जवल योजना के तहत बीपीएल उपभोक्ताओं को 3 महीने के लिए मुफ्त में गैस सिलेंडर देने का ऐलान किया गया उसी को लेकर शुक्रवार को एचपी गैस एजेंसी के बाहर सैकड़ों की तादाद में महिलाएं लाइन में खड़ी देखी गई। जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग का भी उल्लंघन किया गया।

वहीं जब कतार में खड़ी महिलाओं से बात की गई तो उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा 3 महीने के लिए मुफ्त में गैस देने के लिए उनके खाते में पैसे भेजने और गैस सिलेंडी उनके घरों तक पहुंचाने की बात कही थी और लेकिन गैस एजेंसी वाले बीपीएल उपभोक्ताओं को अपने कार्यालय में बुलाकर उनके खातों की जांच कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जिस वक्त उज्जवल योजना के तहत बीपीएल उपभोक्ताओं के फॉर्म भरे गए थे उस वक्त उनके खातों की सही ढंग से जांच क्यों नहीं की और साथ ही उनके मोबाइल नंबर सही ढंग से क्यों नहीं लिए गए।

उस भीड़ में से कुछ महिलाओं का कहना है कि प्रधानमंत्री द्वारा मुफ्त गैस देने की जो राशि है वह खाते में आएगी उसके बावजूद भी गैस एजेंसी द्वारा उन्हें सुबह से ही कार्यालय में बुलाया गया है कि वह अपने खातों की जांच करवाएं। वहीं कुछ बीपीएल उपभोक्ताओं ने बताया कि जब उज्जवल योजना के तहत उनके फॉर्म भरे गए थे तो उस समय बैंक खाते के नंबर और मोबाइल नंबर दिए थे जोकि आज भी चालू हैं, लेकिन गैस एजेंसी वाले बिना मतलब के ही उन्हें परेशान कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि गैस एजेंसी वाले कभी जिओ का मोबाइल नंबर मांगते है तो कभी ऐयरटेल का। एक तरफ प्रधानमंत्री सोशल डिस्टेंसिंग और घरों में रहने की बार-बार अपील कर रहे हैं इसी के साथ केंद्र सरकार द्वारा लाॅकडाउन के दौरान गरीबी रेखा के नीचे वाले लोगों को कई सुविधाएं भी दी जा रही हैं। लेकिन उन सुविधाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए प्रशासन नाकाम है। आखिर क्यों इन लोगों को सैकड़ों की तादाद में गैस एजेंसी के बाहर आना पड़ा।

वही इस संबंध में गैस एजेंसी के कर्मचारी ने बताया कि उज्जवल योजना के तहत कुछ बीपीएल उपभोक्ताओं के फोन नंबर बंद हो चुके हैं जिसकी वजह से इन्हें फिर से नए नंबर देने के लिए बुलाया गया है। लेकिन हैरानगी की बात यह है कि आखिर पैसे सरकार द्वारा उपभोक्ताओं के खाते में डाले जाऐंगे और गैस एजेंसी उनसे पैसे लेकर सिलेंडर देगी, तो फिर मोबाइल नंबर का झंझट क्यों डाला जा रहा है। जिस कारण लोगों को मजबूरन बाहर आना पड़ रहा है।

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