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स्टेशनरी की दुकानों को भी आवश्यक सेवाओं में किया जाये शामिल : बच्चों के अभिभावक

जम्मू । एएनएन (Action News Network)

कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए जारी देशव्यापी लॉकडाउन के चलते बच्चों को पास करके अगली कक्षाओं में भेज दिया गया है। साथ ही नीजि और सरकारी स्कूलों ने ऑनलाइन पढ़ाई भी शुरू कर दी है। लेकिन सभी बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई करने की स्थिति में नहीं हैं। इसके बावजूद भी बच्चों के पास पुस्तकें नहीं हैं। इससे उनके अभिभावक और बच्चे दोनों ही काफी हद तक परेशान हैं।

इस बारे में बुधवार को अपने विचार प्रकट करते हुए कई बच्चों के अभिभावकों ने कहा कि सरकार को चाहिए कि वो स्टेशनरी की दुकानों को भी आवश्यक बस्तुओं की सूची में शामिल करे। एक बच्चे के अभिभावक संजय ने अपनी चिंताओं को जाहिर करते हुए बताया कि उनके बेटे ने भी ग्यारवी कक्षा में ऑनलाइन का दाखिला ले लिया है और कुछ दिनों तक उसे ऑनलाइन ही पढ़ाई का काम मिलना शुरू हो जायेगा। लेकिन स्टेशनरी की दुकानें खुली नहीं होने के कारण वह अगली कक्षा की किताबें अभी तक नहीं ले पाये हैं। अब जबकि लॉकडाउन तीन मई तक बढ़ गया है तो ऐसे में सरकार को चाहिए कि वो स्टेशनरी की दुकानों को खोलने के लिए इन दुकानों को भी आवश्यक सेवाओं की सूची में डाले।

वहीं इसी तरह से अभिभावक महेश ने बताया कि उनके बच्चे दसवीं तथा पांचवीं कक्षा में पढ़ते हैं और उनको भी ऑनलाईन काम स्कूल से तो मिल रहा है लेकिन बच्चों के पास आवश्यक किताबें नहीं हैं जिससे उनको कुछ हद तक दिक्कत आ रही है इसके साथ ही नोट बुकें भी उपलब्ध नहीं होने से वे परेशान हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वो स्टेशनरी की दुकानों को खोलने पर भी विचार करे ताकि बच्चों और उनके अभिभावकों को कुछ हद तक राहत मिल सके।

एक अन्य अभिभावक सुनील ने कहा कि सरकार ने बच्चों को अगली कक्षा में बिठाने को फैसला तो बिल्कुल सही लिया है लेकिन उसके साथ ही स्टेशनरी की दुकानें खुली रखने के बारे में भी घोषणा कर देनी चाहिए थी ताकि बच्चे साथ-साथ अपनी अगली कक्षाओं की किताबें प्राप्त कर सकते और लॉकडाउन के दौरान घरों में बैठकर ही अपनी पढ़ाई जारी रख सकते। उन्होंने कहा कि हर किसी के पास ऑनलाईन पढ़ाई करने के लिए लैपटॉप या अन्य सुविधाएं नहीं हैं। इसलिए सरकार को स्टेशनरी की दुकानों को खोलने पर विचार करना चाहिए।

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