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सूरत: लॉकडाउन की अफवाह से प्रवासी श्रमिकों का पलायन शुरू

सूरत: लॉकडाउन की अफवाह से प्रवासी श्रमिकों का पलायन शुरू
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सूरत/अहमदाबाद। एक्शन इंडिया न्यूज़

कोरोना के मामलों की संख्या बढ़ने के साथ ही लोगों को एक बार फिर लॉकडाउन होने का भय सताने लगा है। लॉकडाउन लगने की अफवाह से प्रवासी लोगों ने अपने घरों के लिए पलायन शुरू कर दिया है। यद्यपि प्रवासियों को रोकने के लिए अधिकारी और नगर पार्षद लगातार श्रमिकों को समझाने में लगे हैं। राज्य भाजपा अध्यक्ष ने लोगों को लाॅकडाउन की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार और नगर निगम ने नए प्रतिबंधों की घोषणा कर रखी है। इस घोषणा के बाद प्रवासी लोगों में स्वाभाविक रूप से डर का माहौल पैदा हो रहा है। सूरत में लॉकडाउन की अफवाह से पलायन शुरू हो गया है। प्रवासी श्रमिक धीरे-धीरे अपने परिवार के सदस्यों के साथ यूपी-बिहार जाने लगे हैं। लोगों में भय का माहौल देखकर स्थानीय समाजसेवियों और पार्षद लोगों को प्रयास कर रहे हैं।

बताया गया कि पिछले 20 दिन में सूरत में कोरोना का प्रकोप बढ़ रहा है। नगर में रात का कर्फ्यू चल रहा है। हीरा और कपड़ा बाजार और शॉपिंग मॉल शनिवार और रविवार को बंद रखने की घोषणा की जा चुकी है। ऐसे समय में राज्य सरकार राज्यभर में स्थिति को गंभीरता से ले रही है। प्रवासी मजदूरों को भय है कि पूर्व की भांति अचानक लॉकडाउन लगता सकता है। लॉकडाउन की अफवाहों के बीच सूरत के डिंडोली, गोडादरा, उधना और पांडेसरा इलाकों के लोग बस से अपनी मादरे वतन के लिए रवाना हो रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक रोजाना करीब दस से बारह बसें यूपी बिहार के लिए रवाना हो रही हैं।

गुजरात भाजपा के अध्यक्ष और सांसद सीआर पाटिल ने भी शहरवासियों से अपील करते हुए कहा कि किसी को डरने की जरूरत नहीं है, लॉकडाउन लागू करने की कोई संभावना नहीं है। लेकिन पाटिल की कोशिश के बाद भी प्रवासी श्रमिकों के वापस घर लौट रहे हैं। पुलिस आयुक्त अजय तोमर ने भी प्रवासी श्रमिकों से अपील की है कि लॉकडाउन होने की खबर एक अफवाह है, इसलिए श्रमिकों को घर नहीं जाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि सूरत में कई बड़ी औद्योगिक इकाइयों में देश के विभिन्न राज्यों से रोज़गार पाने के लिए लाखों लोग सूरत में रहते हैं। एक साल पहले तालाबंदी के समय, परप्रांतीय श्रमिको की स्थिति बहुत दयनीय थी। उसे अपनी मादरे वतन जाने के लिए बहुत तकलीफ उठानी पड़ी थी।


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