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कठुआ के औद्योगिक इकाई मालिक भी हुए लाॅकडाउन, औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले प्रवासियों को स्थानीय लोग मुहैया करवा रहे हैं खाना

कठुआ के औद्योगिक इकाई मालिक भी हुए लाॅकडाउन, औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले प्रवासियों को स्थानीय लोग मुहैया करवा रहे हैं खाना
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कठुआ, 25 अप्रैल (हि.स.)। प्रवासी दिहाड़ीदार मजदूरों को खाना मुहैया करवाने के लिए कठुआ के स्थानीय लोग बढ़चढ़कर आगे आ रहे हैं। लेकिन औद्योगिक इकाइयों के प्रबंधन की ओर से इन लोगों की सुध लेने कोई नहीं आ रहा। दरअसल कठुआ का वार्ड नंबर 21 औद्योगिक क्षेत्र से सटा हुआ है और कठुआ के वार्ड नंबर 21 में ज्यादातर प्रवासी लोग किराए के मकानों में रहते हैं। यह लोग औद्योगिक क्षेत्र में स्थित विभिन्न इकाइयों में काम करते हैं, वहीं पिछले 1 महीने से लगातार लाॅकडाउन की स्थिति के चलते ज्यादातर औद्योगिक इकाइयां बंद पड़ी हुई हैं और मजदूर किराए के घरों में ही बंद है। हालांकि जिन किराए के मकानों में प्रवासी लोग रह रहे हैं उनके मकान मालिक भी उनसे इस कठिन घड़ी में किराया नहीं ले रहे हैं ओर इन मजदूरों को मोहल्ले के लोग ही आपस में मिलजुल कर खाना मुहैया करवा रहे हैं। लेकिन जिन औद्योगिक इकाइयों में यह प्रवासी लोग काम करते हैं, उन इकाइयों के मालिकों द्वारा पूरे औद्योगिक क्षेत्र में कोई भी लंगर नहीं लगाया गया है। वहीं इनमें से कुछ मजदूरों ने कहा कि जब कठुआ में कोई क्रिकेट लीग के मैच होते हैं तो औद्योगिक इकाई मालिक खुले तौर पर चंदा देते हैं और अगर कठुआ में किसी भी प्रकार का कोई कार्यक्रम हो तो उसमें सभी औद्योगिक इकाइयों वाले अपने एडवर्टाइजमेंट के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर देते हैं। लेकिन जो मजदूर लोग इन औद्योगिक इकाइयों को चला रहे हैं और इन मजदूरों की वजह से यह उद्योगपति बने है। आज इस कठिन घड़ी में कोई भी औद्योगिक इकाई के मालिक की ओर से कठुआ में लंगर नहीं लगाया गया है। वहीं एक मजदूर ने बताया कि फिलहाल अभी लाॅकडाउन की स्थिति है और इकाइयां बंद पड़ी हुई है, लेकिन जिस दिन देश खुलेगा उस दिन औद्योगिक इकाइयंा मंदी की कघार पर होंगी और एक बार फिर से मजदूर ही काम आएगा, मजदूर ही फिर से इनको इस मंदी के दौर से बाहर निकालेगा। लेकिन आज की संकट घड़ी में कोई भी औद्योगिक इकाई वाला इन मजदूरों के लिए लंगर की व्यवस्था नहीं कर रहा है।

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