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बांग्लादेश की बेहतरी के लिए भारत से घनिष्टता जरूरी : डॉ. हसन महमूद

बांग्लादेश की बेहतरी के लिए भारत से घनिष्टता जरूरी : डॉ. हसन महमूद
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ढाका । एक्शन इंडिया न्यूज़

भारत की दोस्ती अतुलनीय है। भारत-बांग्लादेश के बीच व्यापार, संस्कृति और अर्थव्यवस्था सहित बहुआयामी संबंध है। भारत के साथ घनिष्ठ संबंधों के माध्यम से ही बांग्लादेश आगे बढ़ेगा। बांग्लादेश में बीएनपी-जमात की भारत विरोधी और सांप्रदायिक राजनीति, 1971 में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान भारतीय सीमावर्ती राज्यों में बांग्लादेशी शरणार्थियों को शरण देने, शेख मुजीबुर रहमान की हत्या, एक स्वतंत्र देश के रूप में बांग्लादेश को चीन की मान्यता समेत अन्य मुद्दे को लेकर बांग्लादेश के सूचना मंत्री डॉ. हसन महमूद ने बहुभाषी समाचार एजेंसी 'हिन्दुस्थान समाचार' के प्रतिनिधि किशोर कुमार सरकार से खुलकर बातचीत की। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश: -

एक्शन इंडिया समाचार : विपक्षी बीएनपी-जमात की ओर से कहा जाता रहा है कि अवामी लीग सरकार भारत को अपना स्वामी मानती है, इस संबंध में आपकी क्या राय है?

मंत्री: भारत के साथ हमारा संबंध ऐतिहासिक है। स्वतंत्रता संग्राम में भारत का योगदान बांग्लादेश के इतिहास में दर्ज है और जब तक बांग्लादेश रहेगा, इस‌ योगदान को भुलाया नहीं जा सकेगा। जिस तरह बांग्लादेश की आज़ादी के लिए भारत के स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी शहादत दी थी, उसी तरह भारतीय सेना भी कुर्बान हुई थी। इस लिहाज से भारत की दोस्ती हमारे लिये बेहद महत्वपूर्ण है और इसलिए हम हमेशा भारत को एक घनिष्ठ मित्र के रूप में देखते हैं, स्वामी के रूप में नहीं। बीएनपी ने भारत के प्रति अवामी लीग सरकार के साथ अपने संबंधों को जिस तरह से प्रचारित किया है वह कभी भी एक जैसा नहीं रहा है।

चूंकि भारत हमारा पड़ोसी है, इसलिए व्यापार, संस्कृति और अर्थव्यवस्था सहित भारत के साथ हमारे बहुआयामी संबंध हैं। हमारा अधिकांश सीमा क्षेत्र भारत से लगा है। ऐसे में भारत के साथ घनिष्ठ संबंध होना सामान्य है लेकिन यह सच है कि बीएनपी भारत विरोधी राजनीति कर रही है। हालांकि, पर्दे के पीछे वे भारत को खुश करने की राजनीति करते हैं। अवामी लीग के साथ भारत के संबंध पूरी तरह से पारदर्शी और खुले हैं और हमें लगता है कि हमें अपने पड़ोसी के साथ घनिष्ठ संबंध रखना चाहिए। हमारा देश भारत के साथ करीबी संबंधों के माध्यम से ही आगे बढ़ेगा।

एक्शन इंडिया समाचार : बीएनपी-जमात की शिकायत है कि अवामी लीग सरकार, बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों को पदोन्नति दे रही है। आपको क्या लगता है?

मंत्री: इस देश ने हिंदुओं, मुसलमानों, बौद्धों और ईसाइयों के संयुक्त रक्त के बदले स्वतंत्रता प्राप्त की है। पाकिस्तान धर्म के आधार पर बनाया गया था लेकिन बांग्लादेश के बंगालियों ने धार्मिक विभाजन के आधार पर बनाए गए देश को स्वीकार नहीं किया क्योंकि हर बंगाली की पहली पहचान उसका बंगाली होना है। उसका हिंदू, मुसलमान, बौद्ध या इसाई होना दूसरी बात है। बांग्लादेश अवामी लीग इसी सोच की समर्थक है लेकिन बीएनपी की सोच अलग है। वह लोगों को हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध और ईसाई के रूप में देखती है और विभेद पैदा करती है। बीएनपी हमेशा सांप्रदायिक नफरत फैलाती है। बीएनपी-जमात गठबंधन सरकार के दौरान, अल्पसंख्यकों को योग्यता के आधार पर मूल्यांकन कर पदोन्नत या स्थानांतरित नहीं किया गया। अवामी लीग सरकार में सदैव योग्यता के आधार पर मूल्यांकन किया जाता रहा है। धर्म के आधार पर नहीं।

एक्शन इंडिया समाचार : शेख मुजीबुर रहमान की हत्या के अगले ही दिन चीन से बांग्लादेश को मान्यता दिये जाने के बारे में आपकी क्या राय है?

मंत्री: भारत ने हमारे स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हमें अटूट समर्थन दिया है। बांग्लादेश के एक करोड़ शरणार्थी वहां रहे। भारत की सड़कों पर शरणार्थियों को जगह दी गई। भारत के आम लोगों ने भी शरणार्थियों के लिए चंदा इकट्ठा किया था।सीमावर्ती राज्यों के आम लोगों ने भी शरणार्थियों को अपने घरों में शरण दी थी। एक करोड़ लोगों को आश्रय देना सहज नहीं हैं। उस समय कई देशों ने बांग्लादेश की स्वतंत्रता का विरोध भी किया था। किन राज्यों ने इसका विरोध किया, यह इतिहास के पन्नों में लिखा है। उस समय चीन पाकिस्तान का बहुत करीबी सहयोगी था। शायद पाकिस्तान के करीबी सहयोगी होने के कारण चीन ने बांग्लादेश को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता नहीं दी, जबकि हमारी स्वतंत्रता के महान नायक बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान जीवित थे। हालांकि, बांग्लादेश को मान्यता देने के बाद चीन हमारी अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

एक्शन इंडिया समाचार : भारतीय फिल्में पाकिस्तान में चलती रही हैं लेकिन बांग्लादेश में उन पर रोक है। ऐसा क्यों?

मंत्री: दोनों देशों के बीच मनोरंजन के क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं, इसलिए सभी प्रकार की भारतीय फिल्में बांग्लादेश में प्रसारित होती रही हैं। हालांकि, बांग्लादेश 'आर्टिस्ट्स एसोसिएशन' की आपत्ति के कारण केवल हिंदी फिल्मों पर रोक है। हालांकि, सिनेमा हॉल मालिकों ने मांग की है कि हिंदी फिल्मों के प्रसारण पर प्रतिबंध हटा दिया जाए। वैसे, भारत-बांग्लादेश के फिल्मकार साथ मिल कर फिल्मों का निर्माण कर सकते हैं। इसमें कोई रुकावट नहीं है।

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