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गोरू बिहू के साथ राज्य में रंगाली बिहू आरंभ

गुवाहाटी । एएनएन (Action News Network)

असमिया संस्कृति की जीवन रेखा रंगाली बिहू सोमवार को गोरू बिहू के साथ आरंभ हो गयी। हालांकि, बिहू में जिस तरह का उत्साह होता है, वह इस बार दिखाई नहीं दे रहा है।वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कारण देशव्यापी लॉकडाउन है। ऐसे में इस बार सामूहिक तौर पर बिहू का आयोजन नहीं हो रहा है। रंगाली बिहू का शुभारंभ सोमवार को गोरू (पशु) बिहू के साथ हुआ। लोग अपने पशुओं को घर में ही नहलाकर उनकी पूजा की। जबकि, प्रत्येक वर्ष सुबह के समय खासकर ग्रामीण इलाकों में नदियों व तालाबों में पशुओं को नहलाने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ता था। पशुओं को नहलाने के बाद उनकी पूजा करने तथा उन्हें लौकी, बैगन सहित अन्य खाने-पीने की सामग्री खिलाने की परंपरा है।

इस वर्ष कोरोना वायरस के कारण राज्यवासी रंगाली बिहू के पहले दिन गोरु बिहू के अवसर पर अपने गाय-बैलों को घर में ही नहला कर नियम का पालन किया। ज्ञात हो कि रंगाली बिहू सात दिनों तक मनाया जाता है। सातों दिनों का अलग-अलग नाम हैं, जिसमें मुख्य रूप से पहले दिन गोरु बिहू (गाय बिहू), मानूह बिहू (इंसान बिहू), हाथ बिहू, सेनेही बिहू, माईकी बहू, रंगाली बिहू व तेरा बिहू।राज्य में वर्ष में तीन बिहू मनाया जाता है। जिसे रंगाली, कंगाली व भोगाली बिहू कहते हैं। ज्ञात हो कि बिहू का उत्सव भी मुख्य रूप से कृषि से संबंधित है।

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