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अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज जयंतीलाल वनवासी कल्याण परिषद की प्रतिभा थे ,

अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज जयंतीलाल वनवासी कल्याण परिषद की प्रतिभा थे ,
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उदयपुर । एएनएन (Action News Network)

दक्षिणी राजस्थान के जनजाति क्षेत्र की प्रतिभा अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज जयंतीलाल वनवासी क्षेत्र में कार्य करने वाले वनवासी कल्याण परिषद से उभरी हुई प्रतिभा थे। उन्होंने तीरंदाजी का अपना पहला प्रशिक्षण वनवासी कल्याण परिषद के शिविर में ही प्राप्त किया था, वहीं से उनकी प्रतिभा की पहचान हुई और आगे से आगे सहयोग मिलने के साथ वे भी निखरते गए। उनके आकस्मिक निधन को वनवासी कल्याण परिषद ने जनजाति क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि जनजाति क्षेत्र में प्रतिभाएं भरी पड़ी हैं, केवल उन्हें तलाशने और तराशने की आवश्यकता है। तीरंदाज जयंतीलाल का 31 मई की रात सडक़ हादसे में निधन हो गया था।

वनवासी कल्याण परिषद के प्रदेश मंत्री सुंदर कटारिया ने हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि दक्षिणी राजस्थान का बांसवाड़ा-डूंगरपुर जिला वागड़ क्षेत्र कहलाता है जो पूर्ण रूप से जनजाति बहुल क्षेत्र है। ऐसे जनजाति क्षेत्र डूंगरपुर के बिलड़ी गांव में जन्मे जयंती लाल निनामा के पिता जीवा निनामा कृषक थे। माता भीमली देवी गृहिणी थी। यह जनजाति परिवार सामान्य रूप से मेहनत-मजूरी करके जीवनयापन करता था। सन 1992-93 में वनवासी कल्याण परिषद द्वारा उदयपुर जिले के कोटड़ा में आयोजित तीरंदाजी प्रशिक्षण शिविर में जयंतीलाल भी शामिल हुए। यह उनका तीरंदाजी का प्रथम प्रशिक्षण था। यह प्रशिक्षण 10 दिवसीय था, वहां से उन्होंने जिला व राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लिया। इसके बाद इनके कौशल्य को जानकर राजस्थान राज्य क्रीड़ा परिषद ने अपने खेल छात्रावास में रहकर प्रशिक्षण प्रदान करने की सुविधा उपलब्ध कराई। वहीं रहते हुए जयंतीलाल ने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पदक प्राप्त किए। शुरुआती समय में उनके पास धनुष भी नहीं था। स्थानीय तीरंदाज नरेश डामोर के साथ रहते हुए उनका ही धनुष उपयोग में लिया। यह धनुष नरेश डामोर को भी वनवासी कल्याण आश्रम में उपलब्ध करवाया गया था। उसके बाद क्षेत्रीय सांसद कनक मल कटारा ने डेढ़ लाख रुपये सांसद से देकर जयंतीलाल को धनुष दिलाया। उससे उन्होंने कई पदक प्राप्त किए जिसमें 25 राष्ट्रीय पदक व एक अंतरराष्ट्रीय पदक शामिल हैं।

प्रदेश मंत्री कटारिया बताते हैं कि उनमें राष्ट्रीयता कूट-कूटकर भरी थी। उन्होंने अपने देश के लिए मलेशिया में कोच बनने के प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया। उनको गुरु द्रोणाचार्य जो खेल का श्रेष्ठ पुरस्कार है, भी मिला। ऐसे श्रेष्ठ तीरंदाज होने के बाद भी वह वनवासी कल्याण परिषद के साथ पूर्ण सहयोगी रहे। वनवासी कल्याण परिषद के खेल प्रशिक्षण शिविर डूंगरपुर में खिलाडिय़ों को तीरंदाजी का प्रशिक्षण दिया। परिषद की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता डूंगरपुर में हुई, उस समय उन्होंने वहां मार्गदर्शन किया। खिलाडिय़ों के साथ रहकर तीरंदाजी की विस्तृत जानकारी दी। जयंती लाल कहते थे कि ‘मैं परिषद परिवार का सदस्य हूं।’

कटारिया ने बताया कि जयंतीलाल सहज रूप से राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद डूंगरपुर छात्रावास में आते-जाते रहते थे और बच्चों को खेल का महत्व बताते रहते थे। वे छात्रावास के 3 छात्रों को प्रशिक्षण भी देते थे। जयंतीलाल के निधन पर वनवासी कल्याण परिषद ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि जनजाति प्रतिभावान बच्चों को पर्याप्त संसाधन और अवसर उपलब्ध हो जाए तो वे कीर्तिमान स्थापित कर सकते हैं और वनवासी कल्याण परिषद इसी दिशा में बरसों से कार्यरत है।

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