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टूटी सड़कों से गुजरेंगे दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश के लाखों कांवड़िए

टूटी सड़कों से गुजरेंगे दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश के लाखों कांवड़िए
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मेरठ । एएनएन (Action News Network)

कोरोना आपदा के कारण उत्तर भारत की महत्वपूर्ण कांवड़ यात्रा की तैयारियां भी बुरी तरह से प्रभावित हुई है। कांवड़ यात्रा नजदीक आने के बाद भी दिल्ली-रूड़की रोड हाईवे की हालत नहीं सुधरी है। ऐसे में जुलाई में होने वाली कांवड़ यात्रा में दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान के लाखों कांवड़ियों को टूटी सड़कों से ही गुजरना होगा।

सावन माह की शिवरात्रि को करोड़ों कांवड़िए हरिद्वार से पैदल ही गंगाजल लाकर अपने आराध्य भगवान आशुतोष का जलाभिषेक करते हैं। इनमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि राज्यों के कांवड़िए शामिल होते हैं। दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान के कांवड़िए दिल्ली-रूड़की हाईवे से होकर जाते हैं। कांवड़ यात्रा के कारण इस हाईवे पर लगभग 15 दिन यातायात बंद रहता है। प्रत्येक वर्ष यातायात को चालू रखने और कांवड़ियों की राह भी सुगम करने के लिए कई फैसले होते हैं, लेकिन उन पर अमल नहीं किया जाता। इसी कारण कांवड़ यात्रा के दौरान वेस्ट यूपी का सारा कारोबार भी ठप हो जाता है।

कांवड़ यात्रा तक शुरू होने थे कई प्रोजेक्ट

मेरठ में कांवड़ यात्रियों की सुविधा के लिए एनएच-58 पर पल्लवपुरम में बन रहे फ्लाईओवर का एक हिस्सा चालू किया जाना था। इसी तरह से परतापुर में बन रहे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस का एक हिस्सा चालू किया जाना था, जिससे यात्रियों को कोई दिक्कत ना रहे। इसी तरह से टूटी हुई सड़कों को भी कांवड़ यात्रा से पहले दुरुस्त किया जाना था। कोरोना के कारण लागू लाॅकडाउन में सारे कार्य रुक गए।

गंगनहर पटरी मार्ग पर संकट बरकरार

कांवड़ यात्रियों की राह को आसान बनाने के लिए गंग नहर के किनारे उत्तराखंड के रूड़की से लेकर गाजियाबाद के मुरादनगर तक कांवड़ पटरी का निर्माण किया गया। इस रूट पर सुरक्षा कारणों चलते कांवड़िए गुजरने से बचते हैं। इस कांवड़ मार्ग को दो लेन का भी कर दिया गया, लेकिन कांवड़ियों की समस्याओं का अंत नहीं हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस कांवड़ मार्ग को चौड़ा करने की मंजूरी भी दे चुके हैं, लेकिन फाइल अभी भी सरकारी विभागों में अटकी है।

शिवरात्रि तक नहीं हो पाएंगे कार्य

लाॅकडाउन में काम बंद रहने के कारण 19 जुलाई शिवरात्रि तक टूटी सड़कों की मरम्मत और अधूरे विकास कार्य नहीं हो पाएंगे। अभी कांवड़ यात्रा को लेकर प्रशासन की कोई बैठक भी नहीं हुई है। जबकि इससे पहले ही उत्तराखंड और यूपी के पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के बीच समन्वय बैठक के बाद तैयारियां शुरू हो जाती थी। लाॅकडाउन ने कांवड़ यात्रा की तैयारियों को भी प्रभावित किया है। मेरठ की आयुक्त अनीता सी मेश्राम का कहना है कि कांवड़ यात्रा को लेकर शासन से दिशा-निर्देश मांगे जाएंगे। वहां से निर्देश आने के बाद ही कांवड़ यात्रा पर निर्णय होगा।

बागपत में पुरा महादेव व मेरठ में औघड़नाथ प्रमुख स्थल

शिवरात्रि पर लाखों कांवड़िए मेरठ के औघड़नाथ शिव मंदिर में जलाभिषेक करते हैं तो बागपत में परशुरामेश्वर पुरा महादेव मंदिर में जल चढ़ाते हैं। लोग पैदल, डाक कांवड़, साईकिल आदि साधनों से हरिद्वार से गंगाजल लेकर आते हैं। इसके बाद कांवड़िए अपने क्षेत्र के शिवालय में जल चढ़ाते हैं।

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