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भगवान श्रीराम की तपोभूमि में खुल गये मनोकामनाओं के पूरक भगवान कामतानाथ के कपाट

भगवान श्रीराम की तपोभूमि में खुल गये मनोकामनाओं के पूरक भगवान कामतानाथ के कपाट
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  • सेनेटाइजर और थर्मल स्क्रीनिंग से गुजरने के बाद ही श्रद्धालु कर सकेंगे कामतानाथ के दर्शन

चित्रकूट । एएनएन (Action News Network)

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के बढते प्रकोप की रोकथाम की मंशा के चलते 80 दिनों पूर्व केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के आदेश पर स्थानीय शासन-प्रशासन द्वारा बंद कराये गये धार्मिक स्थल सोमवार को पूरे विधि विधान के साथ पूजन-अर्चन के बाद श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिये गये। भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट के प्रमुख मनोकामनाओं के पूरक देवता भगवान श्रीकामतानाथ के कपाट खुलते ही दर्शन के लिए भक्तों की उमड़ने लगी। वहीं मंदिर प्रशासन द्वारा कोरोना के बचाव के लिए मठ-मंदिरों में पुख्ता इंतजाम किये गये है। थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए ही श्रद्धालुओं को भगवान कामतानाथ जी के दर्शन हो सकेेगें।

विश्व में आदि तीर्थो में सुमार चित्रकूट में भगवान श्रीराम ने वनवास काल का सर्वाधिक साढे 11 वर्ष व्यातीत किये थे। इसके अलावा माता सती अनुसुईया एवं अत्रि आदि महान ऋषि-मुनियों की तपोभूमि होने के कारण धार्मिक,पौराणिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से धर्म नगरी चित्रकूट का समूचे विश्व में विशेष महत्व है। भगवान श्रीराम के वरदान से मनोकामनाओं के पूरक बने चित्रकूट के कामदगिरि के दर्शन-पूजन एवं पंचकोसीय परिक्रमा के लिए प्रतिवर्ष देश भर से करोडों करोडों श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगता है। सर्वप्रथम माता सती अनुसुईया के तपोबल से प्रकटी जीवन दायनी मां मंदाकिनी में स्नान करने के बाद रामघाट तट पर भगवान ब्रम्हा द्वारा स्थापित सृष्टि के प्रथम शिवलिंग स्वामी मत्गयेंद्र नाथ भगवान के जलाभिषेक करने के बाद मनोकामनाओं के पूरक भगवान श्री कामतानाथ के दर्शन-पूजन कर पंचकोसीय परिक्रमा लगाते है।

इधर, देश में वैश्विक महामारी कोराना वायरस के बढते प्रकोप को दृष्टिगत रख केंद्र की मोदी सरकार द्वारा ऐतिहातन सभी धार्मिक स्थलों को लाक डाउन तक बंद रखने के आदेश जारी किये थे। जिसके अनुपालन में उत्तर प्रदेश के चित्रकूट एवं मध्य प्रदेश के सतना जिला प्रशासन द्वारा कामतानाथ, हनुमान धारा, सती अनुसुईया, स्फिटिक शिला, गुप्त गोदावरी आदि मंदिरों के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बंद करा दिये गये थे। सरकार द्वारा लाक डाउन-4 के बाद धार्मिक स्थलों को शर्तो के साथ खोलने की छूट देने की घोषणा के बाद सोमवार को करीब 80 दिनों के लाक डाउन के बाद भगवान श्रीकामतानाथ के कपाट खोले गये। कामदगिरि प्रमुख द्वार में जहां महंत मदन गोपाल दास महाराज द्वारा पूरे विधि-विधान के साथ पूजन-अर्चना के बाद मंदिर के कपाट प्रशासन की मौजूदगी में आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोले गये। मंदिर के मंहत मदन गोपाल दास महाराज ने बताया कि शासन के निर्देशों का कडाई से अनुपालन करते हुए श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए मंदिर के कपाट खोले गये है।

कोरोना संक्रमण का खतरा ने होे,इसके लिए मंदिर परिसर को प्रतिदिन सेनेटाइज करने का इंतजाम किया गया है। इसके अलावा मंदिर प्रशासन द्वारा गठित की गई समिति आने वाले श्रद्धालुओं की थर्मल स्कैनिग मशीन से कोरोना की संभावित जांच करेगा। मंदिर परिसर में बेरीकेटिंग कराई गई है। ताकि सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर पांच-पांच की संख्या में प्रवेश देकर श्रद्धालुओं को भगवान कामतानाथ जी के दर्शन कराये जा सकें।वहीं मध्य प्रदेश शासन द्वारा भी कामदगिरि प्रमुख द्वार मंदिर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये है। कोई भी श्रद्धालु किसी भी दशा में भगवान श्रीकामतानाथ की मूर्ति को स्पर्श नही कर सकेगा।

वहीं कामतानाथ प्रचीन मुखार बिंद मंदिर में प्रधान पुजारी भरत शरण दास महाराज ने ब्रम्ह मुर्हूत में भगवान कामतानाथ मंदिर के कपाट खोले।इसके बाद अभिषेक और श्रंगार करने के बाद भगवान श्रीकामतानाथ जी की मंगला आरती कर भोग लगाया। प्रधान पुजारी भरतशरण दास महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकामतानाथ जल्द ही देश को कोरोना महामारी के संकट से निजात दिलायेगे। बताया कि मंदिर में बेरीकेटिंग कर सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क के साथ ही दर्शन की व्यवस्था ही गई है। मंदिर के अंदर नारियल आदि प्रसाद चढाने पर रेाक लगाई है।

वहीं, जिलाधिकारी शेषमणि पांडेय का कहना है कि भगवान श्रीराम की साधना और आराधना स्थली होने के कारण ही समूचे विश्व में चित्रकूट की पहचान है। उन्होेने बताया कि शासन द्वारा तय की गई गाइड लाइन के मुताबिक ही मंदिरों के कपाट खोलने की अनुमति दी गई है। कोरोना की रोकथाम को दृष्टिगत प्रतिदिन पूरे मंदिर परिसर को सेनेटाइज करने के निर्देश दिये गये है। इसके अलावा सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर लाक डाउन के नियमों का अनुपालन करके ही भगवान कामतानाथ जी के दर्शन कराने के मंदिर प्रशासन को निर्देशित किया गया है। वहीं मंदिरों के कपाट खुलने का पहला दिन होने के कारण यूपी के चित्रकूट, बांदा, फतेहपुर आदि तथा मध्य प्रदेश के सतना, रीवा, पन्ना, छतरपुर आदि जिलों के ही श्रद्धालुओं का जमावडा देखने को मिला। कोरोना के खतरे से सचेत श्रद्धालु पूरी सावधानी के साथ मंदिरों में प्रवेश कर भगवान श्री कामतानाथ के दर्शन करते नजर आयें।

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