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कोविड -19 से अमेरिका पढ़ने आने वाले भारतीय छात्र पसोपेश में

लॉस एंजेल्स । एएनएन (Action News Network)

कोविड-19 महामारी के चलते अमेरिका के स्कूल और कालेज में ई-लर्निंग में छात्र और छात्राओं की उदासीनता के संकेत मिल रहे हैं। एक स्टडी के अनुसार दस में से चार छात्रों ने कहा है कि वह नियमानुसार स्कूल कालेज से एक वर्ष तक अनुपस्थित रह सकते हैं। इस दौरान उन्हें स्कूल कालेज की फ़ीस से मुक्ति मिल सकती है। ब्रियान कम्यूनिकेशन्स की ओर से की गई स्टडी के अनुसार अमेरिका के विभिन्न स्कूल कालेजों में भारत, चीन और दुनिया भर से आने वाले लाखों अन्तर्राष्ट्रीय छात्रों की ग़ैर हाज़िरी से प्राइवेट एजुकेशन बोर्ड के लिए घोर संकट खड़ा हो गया है। अमेरिका को अन्तर्राष्ट्रीय छात्रों से प्रति वर्ष 41 से 45 अरब डालर की ट्यूशन फ़ीस हासिल होती है, जो एक बहुत बड़ी रक़म है। इस फ़ीस से टीचरों का वेतन ही नहीं, होस्टल और कालेज का संचालन हो पाता है। सन 2018-19 में बोर्ड ने 41 अरब डालर ट्यूशन फ़ीस हासिल की थी। ब्रियान कम्यूनिकेशन्स ने हाल ही में कोविड-19 को ले कर एक स्टडी की थी।

भारत अकेला ऐसा देश है, जिसके दुनिया में सब से अधिक छात्र अमेरिका में पढ़ाई के लिए आते हैं। ऐसे छात्रों की संख्या क़रीब दो लाख बताई जाती है। कोविड-19 के कारण स्कूल कालेज और उनके होस्टल बंद होने के कारण हज़ारों छात्र-छात्राएँ अधर में हैं, जो अपने रिस्तेदारों अथवा सस्ते होटल और मोटल में अंतराष्ट्रीय उड़ानें खुलने की इंतज़ार कर रहे हैं। ऐसे सैकड़ों भारतीय छात्र इन दिनों भारतीय दूतावास और हिंदू स्वयं सेवक संघ की सहयोगी संस्था सेवा भारती इंटरनेशनल के भरोसे अमेरिका में रह रहे हैं। भारत से ज़्यादातर छात्र इंजीनियरिंग, एम बी ए और साइंस, म्यूज़िक और आर्ट के विभिन्न पाट्यक्रमों में प्रवेश के लिए आते हैं।

अमेरिकी कालेजों में प्रायः: अमीर वर्ग और नौकरशाहों के अलावा भारतीय यूनिवर्सिटी में टाप करने वाले बच्चे स्कालरशिप पर आते हैं। जानकारों का कथन है कि कोविड -19 महामारी के कारण इस साल के अंत तक स्कूल कालेजों में फिर से पढ़ाई-लिखाई होना संभव प्रतीत नहीं होता। जुलाई-अगस्त में नया सत्र शुरू होता है तो अगले सत्र के लिए तभी से तैयारी शुरू हो जाती है। यह महामारी सितंबर तक जारी रहती है, तो मुमकिन है, अगले सत्र 2021-22 के लिए छात्र अपना नाम दर्ज कराने में संकोच बरतें। नियमानुसार पूर्व अनुमति से छात्र एक वर्ष की छुट्टी (गैप) ले सकते हैं और इस दौरान वे स्कूल कालेज की फ़ीस देने से बच सकते हैं। स्थानीय छात्र को ट्यूशन फ़ीस के रूप में प्रति वर्ष 37500 डालर फ़ीस देनी होती है तो विदेशी छात्र को तीन साल की डिग्री कोर्स के लिए ट्यूशन फ़ीस और होस्टल के लिए क़रीब ढाई लाख डालर व्यय करना ज़रूरी होता है।

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