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पिता के नाम पुत्र का पत्र

पिता के नाम पुत्र का पत्र
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पापा.. आपको गए आज पूरा एक महीना बीत चुका है। इत्तेफाक देखिए, 14-11-2020 को जब आप स्वर्गलोक सिधारे तो उस दिन भी पितृ अमावस्या थी और आज जब मैं कुरुक्षेत्र (पेहवा) आया हूं तो भी 14-12-2020 को सोमावती अमावस्या जैसा बड़ा दिन है। आप हमेशा कहते थे कि ईश्वर ने इंसान को सांसे गिनकर दी हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि मृत्यु का कारण अलग-अलग हो सकता है। आज जब आप हमारे बीच में नहीं हो तो आपकी कहीं सभी बातें प्रमाण के रूप में मेरे सामने आ रहीं हैं।

आप हमेशा कहते थे कि समय सब कुछ सिखा देता है। समय अच्छे और बुरे में फर्क करना सिखा देता है। उस समय आपकी बातें कई बार मुझे असमंजस में डाल देती थी लेकिन, आपकी कही एक-एक बात में कितनी गहराई थी। मुझे आज इसका आभास हो रहा है।

पूरी दुनिया आपके सामाजिक और व्यवसायिक दायित्वों को पूरा करने के जुनून से वाकिफ रही है। आप जो ठान लेते थे, उसे पूरा किये बिना नहीं मानते थे। आपकी जिद्द ही थी जो एक्शन इंडिया मीडिया समूह को इस मुकाम तक लेकर आई। आपकी जिद्द ही थी कि रवि, तुझे पत्रकारिता की ही पढ़ाई करनी है।

आपकी जिद्द ही थी जिसने मुझे न्यूज चैनल की अच्छी-खासी नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर किया। आपकी जिद्द ही थी जिसने मुझे वकालत की पढ़ाई करने के लिए भी मजबूर किया। वाकई आप बहुत जिद्दी थे। पिछले कुछ सालों में आपने जिस तरह एक्शन इंडिया की सभी जिम्मेदारियां अचानक मुझपर छोड़ दी थी, उससे मुझे परेशानी और हैरानी। दोनों होती थी।

लेकिन, आज मुझे ये समझ आ रहा है कि आप मुझे इस खुले आसमान में अपने पंख मजबूत कर, उड़ने के लिए तैयार कर रहे थे। आपकी दूरदर्शिता का तो मैं हमेशा कायल रहा। इसलिए नहीं कि आप मेरे पिता थे। बल्कि इसलिए, क्योंकि मैं इस बात से बखूबी वाकिफ था कि आप जो कुछ भी करते थे, उसके पीछे कुछ ना कुछ कारण जरूर होता था। मैं, ईश्वर से यही कामना करता हूं कि मैं भी आप ही की तरह पक्का जिद्दी बन जाउं।

अगर जीवन में कुछ हासिल करना है तो कामयाबी पाने की जिद्द बहुत जरूरी है। पापा आपमे मैंने जिद्द और जुनून, दोनों का मिश्रण देखा। मुझ आज भी याद है कि आपने 6 सालों तक एक भी बाल (केश) ना काटने का प्रण लिया था। आपसे लोग पूछते थे। भाई साहब, अभी आपकी मन्नत पूरी नहीं हुई क्या? यही सवाल मैंने भी आपसे कई बार पूछा लेकिन आप हमेशा हंसकर बात टाल देते थे। लोग कहते हैं कि जिद्द अच्छी चीज नहीं होती लेकिन मैं ये मानता हूं कि कामयाबी पाने की आपकी जिद्द ने ही एक्शन इंडिया को शून्य से शिखर की ओर आगे बढ़ाया।

सभी सोचते हैं कि आप चले गए हो लेकिन, मैं जानता हूं कि आप मेरे साथ थे, हैं और हमेशा रहेंगे। इस रवि में वो राकेश भारद्वाज हमेशा जिंदा रहेगा। मैं बेहद खुशकिस्मत हूं कि मुझे आपके जैसा गुरु मिला। मैं, खुशकिस्मत हूं कि मुझे राकेश भारद्वाज का पुत्र होने का सौभाग्य मिला। मैं, खुशकिस्मत हूं कि मुझे आपके साथ, आपके साये की तरह साथ रहने का मौका मिला। मैं, खुशनसीब हूं कि मुझे आपके जैसा पिता, दोस्त, हमकदम, गुरु, सारथी और मार्गदर्शक मिला।

पापा, मैं आपको और बालाजी महाराज को साक्षी मानकर ये प्रण लेता हूं कि आपके नाम, आपके काम और आपके सम्मान को कभी कम नहीं होने दूंगा। एक्शन इंडिया सदैव एक्शन में रहेगा और उन सभी सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करेगा, जो हमेशा आपकी प्राथमिकता रहे। हम, आपके आर्शीवाद से नित-नए वेंचर शुरु करेंगे। आपके दिखाए मार्ग पर चलते हुए हमेशा कुछ नया करने की कोशिश करते रहेंगे।

आपका पुत्र

रवि राकेश भारद्वाज

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