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कौन है बलवीर पूरी जिनको मिला निरंजनी अखाड़े का दायित्व, जिसने सुलझा दी नरेंद्र गिरि के मौत की गुत्थी

कौन है बलवीर पूरी जिनको मिला निरंजनी अखाड़े का दायित्व, जिसने सुलझा दी नरेंद्र गिरि के मौत की गुत्थी
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प्रयागराज . एक्शन इंडिया न्यूज़

महंत नरेंद्र गिरि के मौत को 15 दिन से अधिक का समय बीत चूका है। लेकिन सीबीआई के हाथ अब भी कुछ नहीं लगा है। इसका कारण क्या हो सकता है। क्या सीबीआई को जाँच करने से रोका जा रहा है या फिर सीबीआई इस गुत्थी को सुलझाना नहीं चाह रही। बलवीर पूरी को ही क्यों मिला अखाड़े का दायित्व आइये जानते है ?

देश भर में अपने बयान की वजह से सुर्ख़ियों में रहने वाले नरेंद्र गिरी की मौत संदिग्ध परिस्थिति में हो गयी थी। जिसके बाद पुरे देश के साधु संतों में काफी आक्रोश देखने को मिला। लेकिन जैसे - जैसे समय बीतता जा रहा है लोग इसको भूलते जा रहे है। सरकार की तरफ से सीबीआई को जाँच के आदेश तो आगये है लेकिन अभी इसके हाथ बधें हुए लग रहें है। कुछ हो या न हो लेकिन बलवीर पूरी के सर पर महंत का ताज सज ही गया।

बता दें की बलवीर गिरि इस समय निरंजनी अखाड़े के उपमहंत हैं। वो हरिद्वार स्थित बिल्केश्वर महादेव मंदिर की व्यवस्था का संचालन करते हैं। महंत नरेंद्र गिरि ने 10 साल पहले एक वसीयत तैयार की थी और उसे आनंद गिरि के नाम कर दिया था। वही आनंद गिरि जो इस समय अपने गुरु कि आत्महत्या के मामले में गिरफ्तार हैं, उनसे नाराजगी के बाद नरेंद्र गिरि ने वो वसीयत रद्द कर दी। बाद में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने बलवीर गिरि के नाम वसीयत कर दी।

बलवीर 1998 में निरंजनी अखाड़े के संपर्क में आए वहीँ इनका संपर्क नरेंद्र गिरि से साल 2001 में हुआ। उस वक्त नरेंद्र गिरि निरंजनी अखाड़े के कारोबारी महंत थे। उनके दीक्षा ग्रहण कर बलवीर उनके शिष्य हो गए। बलवीर गिरि के जन्मस्थान की बात किया जाये तो वे उत्तराखंड के रहने वाले हैं। वो 2005 में संत बने और 2019 से बिल्केश्वर महादेव मंदिर की व्यवस्था देखने लगे। चौकाने वाले बात यह है कि बलबीर गिरि और आनंद गिरि करीब-करीब एक ही समय के दौरान महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य बने थे। लेकिन शायद दोनों के रास्ते अलग हो गए कोई।

महंत नरेंद्र गिरि ने बलबीर गिरि को हरिद्वार आश्रम का प्रभारी बनाया। बाद में उनके अच्छे बर्ताव और निष्ठा भाव देखकर नरेंद्र गिरि ने बलबीर गिरि को अपना उत्तराधिकारी भी घोषित किया है। एक समय ऐसा भी आया जब बलबीर गिरि और आनंद गिरि के सबसे करीब माने जाते थे, लेकिन उनके निष्कासन के बाद बलबीर ही मठ का पूरा कामकाज संभाल रहे थे. किसी भी प्रमुख आयोजन या वार्ता में वह महंत नरेंद्र गिरि के साथ होते थे।

नरेंद्र गिरि की उन पर निर्भरता और विश्वास इस कदर था कि कुंभ और बड़े पर्व के दौरान अखाड़े और मठ की ओर से खर्च के लिए आने वाले लाखों रुपये उनके पास ही रखते थे साथ ही वह पैसा उन्हीं की देखरेख में खर्चा किया जाता था। हालांकि, वह अखाड़े के किसी महत्वपूर्ण पद पर नहीं थे पर, उनकी सेवाएं और निष्ठा के चलते अखाड़े ने उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी। इसके बाद से ही बलवीर पुरी और श्रीमहंत नरेंद्र गिरि का साथ छूट गया। श्रीमहंत नरेंद्र गिरि के हरिद्वार प्रवास के दौरान बलवीर पुरी उनकी सेवा में पहुंच जाते थे। श्रीमहंत की मौत के बाद सामने आए सुसाइड नोट में उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने के योग्य बताते हुए उत्तराधिकारी के तौर पर पेश भी किया।

मंगलवार को सभी तरह के विधि - विधान से बलवीर गिरि को मठ का अध्य्क्ष बनाया गया। मठ बाघंबरी गद्दी के नए महंत और बड़े हनुमान मंदिर के प्रमुख आचार्य के रूप में महंत बलबीर गिरि का पट्टाभिषेक मंगलवार को हो गया। देशभर से आए साधु-संतों की उपस्थिति में निरंजनी पीठाधीश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि ने महंत नरेंद्र गिरि की वसीयत को आधार मानकर बलबीर गिरि के नाम का अनुमोदन किया। इसके बाद संत समाज ने चंदन तिलक लगाकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच चादर ओढ़ाकर सर्व सर्वसम्मति से बलबीर गिरि को महंत बनाया।

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