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'लॉक' चल रहे देश में आभूषण कारीगरों की जिंदगी 'डाउन'

लॉक चल रहे देश में आभूषण कारीगरों की जिंदगी डाउन
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  • लॉकडाउन में पश्चिम बंगाल व महाराष्ट्र के कारीगर संकट में

  • आभूषण पर चमक बिखरने वालों की खाली हो रहीं जेबें

बलिया । एएनएन (Action News Network)

पश्चिम बंगाल से आए आभूषण कारीगर उत्तम सामंत की दिनचर्या करीब एक माह से एक जैसी ही है। सोना, जागना, खाना और फिर सो जाना। बिना काम के खाली हाथ बैठकर दिन काटना भी मुश्किल हो रहा है। कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान उत्तम के हाथ तो खाली हैं ही। अब उनकी जेबें भी खाली हो गई हैं। किसी तरह उधार मांगकर जिंदगी कट रही है। पश्चिम बंगाल के अलावा महाराष्ट्र के तकरीबन 80 आभूषण कारीगरों की दिनचर्या उत्तम सामंत के जैसी ही है।

उद्योग शून्य जिले के मुख्यालय स्थित शहर के बीचोंबीच ओकडेनगंज पुलिस चौकी के ठीक सामने सराफा बाजार के रूप में विख्यात लक्ष्मी मार्केट में महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल से आए कारीगर दिनरात आभूषण बनाने में जुटे रहते थे। काम का बोझ इतना रहता था बमुश्किल ही पूरी नींद ले पाते थे। जैसे ही कोरोना ने देश में पांव पसारना शुरू किया, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशव्यापी लॉकडाउन कर दिया। ऐसे में एक झटके में समूचे देश के साथ-साथ सर्राफा बाजार भी लॉक हो गया।

लेकिन इसमें कारीगरों की जिंदगी 'डाउन हो गई है। मुख्य रूप से महाराष्ट्र व पश्चिम बंगाल से आकर यहां रहने वाले लगभग 80-90 कारीगरों के सामने अजीबोगरीब संकट पैदा हो गया है। उन्हें कुछ भी सूझ नहीं रहा कि आखिर जाएं तो कहां जाएं। बाजार बंद हैं। आभूषण की बिक्री हो नहीं रही। ऐसे में आभूषणों की कारीगरी भी ठप है। काम ठप होने से दिन के चौबीस घंटे के एक-एक पल इन आभूषण कारीगरों के लिए भारी पड़ रहे हैं। हालांकि भोजन का तो जुगाड़ हो जा रहा है। क्योंकि जिन सर्राफा व्यवसायियों ने उन्हें बुलाया है, वे इन्हें उधार पैसे दे रहे हैं। कई व्यवसायी तो मुफ्त भोजन भी करा रहे हैं। फिर भी इनकी सभी जरूरतें पूरी नहीं हो पा रहीं। घर-परिवार की चिंता है सो अलग।

गुरुवार को बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिन्दुस्थान समाचार' ने सुदूर प्रदेशों से आकर आभूषण में चमक बिखेरने वाले कारीगरों की जिंदगी में छाए अंधेरे को समझने का प्रयास किया। कई कारीगरों से बात हुई। सभी की समस्या एक है। सराफा बाजार जल्द नहीं खुले तो इन्हें और भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

सरकार बाजार खोले या हमें घर भेज दे

पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर में घटाल के रहने वाले उत्तम सामंत ने कहा कि सरकार कुछ व्यवस्था करे या हमें सकुशल घर भेज दे।हमें यहां भी चिंता है। घर की चिंता भी है। घर रहेंगे तो चिंता कुछ कम होगी। उन्होंने बताया कि मैं सुनील ज्वेलर्स के यहां काम करता हूं। अब उनसे उधार मांग कर काम चला रहा हूं। सवलिया लहजे में कहा कि येे उधार केे पैसे लौटाने भी तो पड़ेंगे। बताया कि करीब 90 लोग दूसरे प्रदेशों के यहां आकर रहते हैं। गहना बनाते हैं। सरकार से मांग किया कि यहां कोरोना नहीं है तो सराफा बाजार को खोल देना चाहिए। या होम डिलीवरी की इजाजत देनी चाहिए। ताकि हमें भी काम मिल सके।

स्थानीय मजदूरों के सामने भी गहराया संकट

महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के अलावा यहां स्थानीय आभूषण कारीगर भी संकट में हैं। स्थानीय आभूषण कारीगर सत्यप्रकाश बताते हैं कि हमलोग मजदूरी कर अपना परिवार चलाते हैं। सरकार अन्य सेक्टरों को खोलने जा रही है। जबकि हामरी चिंता कोई नहीं कर रहा। कहा कि जब तक गहने की दुकानें नहीं खुलेंगी हम बैठे रहेंगे। इससे हमारे परिवारों के सामने संकट बढ़ता जाएगा।

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