Top
Action India

लॉक डाउनः नैनीताल होटल एसोसिएशन ने सरकार की समिति को भेजे सुझाव

लॉक डाउनः नैनीताल होटल एसोसिएशन ने सरकार की समिति को भेजे सुझाव
X

नैनीताल । एएनएन (Action News Network)

नैनीताल होटल ऐंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने लॉक डाउन हटने के बाद पड़ने वाले कोरोना काल के प्रभाव के मद्देनजर सरकार की समिति को बुधवार को लिखिति सुझाव भेजे हैं। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में लॉक डाउन को हटाये जाने के बाद उद्योगों को राहत देने के लिए प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव इंदु कुमार पांडे की अध्यक्षता में समिति गठित की है। एसोसिएशन ने समिति को पत्र के जरिये अपनी आवश्यकताओं से अवगत कराया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश साह के हवाले से वेद साह ने बताया है कि लॉकडाउन का आतिथ्य क्षेत्र, विशेष रूप से होटल और पर्यटन उद्योग पर ‘विनाशकारी प्रभाव’ पड़ा है।

लोगों में इस दौरान पड़ी सामाजिक दूरी की आदत के कारण किसी भी अन्य उद्योग की तुलना में इसे पुनर्जीवित करने में अधिक समय लगेगा क्योंकि यह प्रस्थिति सामान्य होने के बाद भी लोग लंबे समय तक यात्रा करने से डरेंगे। लॉक डाउन के बाद लोगों की आर्थिक स्थिति खराब हो जाएगी और खर्च करने की क्षमता भी बहुत कम हो जाएगी। साथ ही लोग इस दौरान मिले अवकाश के बाद आगे अवकाश में भी अपने खोये हुए व्यवसायों को पुनर्जीवित करने में व्यस्त होंगे। ऐसे में वर्ष की आखिरी तिमाही पर भी पर्यटन कारोबार के धुरी पर लौटने की संभावना कम है। उन्होंने कहा कि मार्च के तीसरे सप्ताह से पर्यटन कारोबार ठप होने की वजह से उनके लिए अपने कर्मचारियों को वेतन का भुगतान करना भी असंभव हो गया है।

पत्र में कहा गया है कि इसलिए पर्यटन प्रतिष्ठानों को ईएसआईसी की कवरेज सीमा से परे कर्मचारियों का 25 फीसद भुगतान ही करने की अनुमति मिलनी चाहिए और शेष राशि का भुगतान सरकार सरकार द्वारा किया जा सकता है। वहीं जो इकाइयां ईएसआईसी के अंतर्गत नहीं आती हैं, लेकिन जीएसटी में शामिल हैं, सरकार सभी कर्मचारियों को बिल द्वारा स्वीकृत और सीए द्वारा प्रमाणित वेतन का भुगतान कर सकती है। साथ ही चूंकि यह उद्योग बहुत पूंजी आधारित है और उन पर बैंकों से लिए गए ऋणों की किस्तों के ब्याज और अदायगी का भारी बोझ है। इसलिए ऋण की किस्तों को कम से कम 6 महीने के लिए टालने और इस अवधि के लिए ब्याज पूरी तरह से माफ करने का अनुरोध किया गया है।

इसके अलावा उन्होंने सस्ती यात्रा की पेशकश करने और रहने के लिए पर्यटन उद्योग पर कम कराधान का भी अनुरोध किया गया है, और जीएसटी के स्लैब को 12 फीसद से घटाकर 5 फीसद और 18 फीसद से घटाकर 12 फीसद करने तथा जीएसटी के भुगतान को कम से कम दो साल के लिए छह मासिक किये जाने और पानी और सीवरेज के शुल्क में कम से कम 5 वर्षों के लिए हर साल होने वाली 15 फीसद की स्वचालित वृद्धि को पूरी तरह से स्थगित करने तथा लॉक डाउन की अवधि के दौरान जल का उपयोग होने के कारण पानी और सीवरेज शुल्क पूरी तरह से माफ करने की मांग भी की गई है।

साह ने बताया कि इसी तरह लॉकडाउन अवधि के लिए बिजली के बिलों में भी ‘फिक्स्ड’ दरों पर यूपी की तरह छूट देने और इस अवधि के बिलों को 6 महीने के बाद बिना किसी दंड के भुगतान करने की अनुमति देने तथा महाराष्ट्र, पंजाब और विभिन्न राज्यों के अन्य विद्युत नियामक आयोगों द्वारा की गई घोषणाओं की तर्ज पर 5 वर्षों की अवधि के लिए वाणिज्यिक विद्युत शुल्क में लगभग 10 फीसद की कमी करने एवं एक अप्रैल 2020 से शुरूएक वर्ष की अवधि के लिए स्थानीय नगर करों को भी स्थगित करने एवं इसे राज्य सरकार द्वारा वहन कराने की मांग की गई है। इसके साथ ही लॉक डाउन के बाद प्रदेश के पर्यटन गंतव्यों को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के लिए विज्ञापन देने और घरेलू पर्यटन को प्रोत्साहित करने, विदेशी शराब पर वैट और उपकरों में 31 मार्च 2021 तक छूट देने, न्यूनतम मजदूरी कम से कम अगले दो वर्षों के लिए तय नहीं करने की मांग भी की गई है।

Next Story
Share it