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कोरोना ने फूल व्यवसाय को 'लॉक' कर माली समाज की हालत किया 'डाउन'

कोरोना ने फूल व्यवसाय को लॉक कर माली समाज की हालत किया डाउन
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बेगूसराय । एएनएन (Action News Network)

फूलों की खुशबू से घर संसार को महकाने वाले माली समाज आज वैश्विक महामारी कोरोना में रोजी-रोटी को तरस रहे हैं। सुबह-सुबह पुड़िया बांधकर घर-घर फूल, माला पहुंचाने वाले माली से लोगों ने फूल लेने से मना कर दिया है। जिससे इनके जीवन यापन तथा रोजी-रोटी पर संकट पैदा कर दिया है। बगीचे में फूलों की बिक्री नहीं होने के कारण बर्बादी निरंतर जारी है। वहीं, दूसरी ओर मौसम की मार ने फूलों को तहस-नहस कर कहीं का नहीं छोड़ा है। बेगूसराय जिला के विभिन्न हिस्सों में करीब 50 एकड़ से अधिक में गेंदा, गुलाब, कनेल, तगरी, बेली, चमेली, जुही, कामिनी आदि की खेती होती है।

यहां से प्रत्येक दिन जिला के फूल मंडी कर्पूरी स्थान, बाबा हरिगिरि धाम समेत आसपास के जिलों में भी भेजे जाते थे। लेकिन कोरोना ने इस व्यवसाय को लॉक कर माली समाज की हालत डाउन कर दिया है। बेगूसराय में दस लाख से अधिक के फूल सूख कर बर्बाद हो चुके हैं। आमतौर पर जनवरी-फरवरी के माह में फूलों की खेती की जाती है और मार्च-अप्रैल में फूलों को तोड़कर बाजार में सप्लाई की जाती है, क्योंकि इस माह में शादी विवाह, लग्न, मंडप का जोर रहता है। शादियों में खासकर मरवा, स्टेज, दूल्हा-दुल्हन के लिए सुहाग का सेज यानी पलंग फूलों के द्वारा ही सजाया जाता है और उनके जिंदगी शुरूआत फूलों के सेज के साथ शुरू हो जाती है।

लेकिन आज लॉकडान के कारण मंदिर, शादी-विवाह, राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक, पूजा-पाठ, धर्म-कर्म, श्राद्ध आदि कार्यक्रम बंद होने के कारण अभी फूलों का प्रयोग नहीं हो रहा है। जिसके कारण अत्यंत पिछड़े माली मालाकार समुदाय के लोग आज रोजी-रोटी को तरस रहे हैं। मंदिरों में सन्नाटा तथा विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम नहीं होने से बड़े पैमाने पर होने वाला फूल व्यवसाय ठप पड़ा है। कर्जा लेकर फूलों की खेती करने वाले किसान दूसरे के घरों को सुन्दर करते थे। लेकिन लाॅकडाउन में उनके फूलों की बर्बादी, बिक्री नहीं होने तथा लोगों द्वारा फूल लेने से साफ मना कर देने से उनका जीवन कर्जा के काली जंजीर में जकड़ना तय है।

बहदरपुर निवासी मुरारी मालाकार ने स्थानीय सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरीराज सिंह, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, कृषि मंत्री प्रेम कुमार से राहत-मुआवजा की मांग करते हुए कहते हैं कि फूलों की खेती में लगाई गई हमारी पूंजी डूब गयी है। हमलोग विकट परिस्थितियों में जी रहे हैं। वहीं, राष्ट्रीय फूले ब्रिगेड टीम सह संयुक्त माली मालाकार समाज बिहार के प्रदेश सचिव कृष्णमोहन भारती ने मालाकार समाज की दयनीय स्थिति खराब बताते हुए कहा है कि समाज के लोग फूल माला देकर अपना व अपने परिवार का लालन-पालन करते हैं। लेकिन, लाॅकडाउन ने उनके फूलों की बर्बादी और बिक्री नहीं होने के कारण दाने-दाने को लालायित कर दिया है। बखरी के श्याम मालाकार फूलों की आमदनी से बेटी की शादी का कर्जा चुका रहे थे, जो अब बंद करना पड़ा है।

राष्ट्रीय फूले ब्रिगेड टीम बिहार के उपाध्यक्ष कौशल किशोर क्रान्ति, बेगूसराय जिलाध्यक्ष प्रवीण कुमार उर्फ मुन्ना मालाकार, शशिकान्त मालाकार आदि ने माली समाज के वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से मदद की गुहार लगाई है। इन लोगों का कहना है कि मंदिर और शादि-विवाह समेत सभी शुभ कार्य बंद हैं, जिससे कि हमारे खेतों में गेंदा का फूल बर्बाद हो रहा है। इसमें लगाई गयी पूंजी भी नहीं आयी है, हमलोग बहुत ही विकट परिस्थिति में जी रहे हैं।

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