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महाजन की गिरफ्त में जीने को विवश पान के किसान

महाजन की गिरफ्त में जीने को विवश पान के किसान
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दरभंगा । एएनएन (Action News Network)

कोरोना महामारी को लेकर देशभर में जारी लाकडाउन के दौरान यों तो किसानी के कारोबार से जुड़े सभी किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड रहा है। लेकिन उसमें भी पान उत्पादक किसानों की मानो तो इस लाकडाउन ने कमर ही तोड़ दी है। महीना दर महीना गुजरे इस बेरोजगारी के कारण पान व्यावसाय से जुडे कइयों ने इस दौरान भुखमरी की समस्या का सामना भी किया है। नतीजतन ऐसे लोग आज महाजनों की गिरफ्त में जीने को विवश हैं। जारी लाकडाउन के दौरान पान की दुकानों के बंद हो जाने से पान की बिक्री समाप्त हो गई। वहीं दूसरी तरफ औसतन खपत ना के बराबर होने के कारण ज्यादातर पान की फसलें खेतों में बर्बाद हो गई। जिसको पूछने वाला अबतक कोई नहीं है।

दरअसल अचानक कारोबार की गतिविधियाँ ठप पड जाने के कारण खेतों में लगे पत्तों को संबंधित किसान समय से तोड़ नहीं पाए। ऐसे में अधिकांशतः पत्ते झड़कर नष्ट हो गए। मेहनत से तैयार पत्तों को बर्बाद होता देख ऐसे किसानों के आंखों से आंसू निकल पडते हैं। ऐसे में उन्होंने सरकार से मदद की गुहार लगाई है। बताते चलें कि समग्र मिथिला में पान का अपना एक खासा महत्व है। यहां के तीज-त्योहार हों अथवा अतिथियों का स्वागत, बगैैर पान के संपन्न नहीं माना जाता है। यहाँ ऐसी परंपरा वर्षों पुरानी रही है। लिहाजा पान की परंपरागत महता एवं व्यावसायिक दृष्टिकोण के मद्देनजर जिले भर में पान की खेती लगभग 250 बीघे में की जाती है।

जिस बाबत जिले के सिंहवाडा बाजार निवासी नारायण भगत चौरसिया जो कि स्वयं अपने दो कट्ठे की भूमि में पान की खेती कर इसे स्थानीय कादिराबाद आढत पर बेचने के अलावे घूम-घूमकर पान दुकानदारों को भी बेचते हैं, अपनी आपबीती सुनाते हुए कहते हैं कि लाकडाउन के बाद आज पहला दिन है, जब वो पूर्व की भांति पान बेचने निकले हैं। इस बीच इतने दिनों तक बगैर रोजगार के अपने गुजर-बसर के संदर्भ में वे बताते हैं कि किसी तरह से महाजनों से ले-देकर जीवन-यापन चलता रहा।

जिसे अब सबकुछ सामान्य होने पर धीरे-धीरे चुकता कर दूँगा। साथ ही उन्होंने बताया कि लॉकडाउन होने की वजह से पान की दुकानें बंद रही। जिसके कारण इस दौरान पान की बिक्री पर काफी असर पडा है। पहले यहां के पान के पत्ते दरभंगा के अलावा मधुबनी, सीतामढ़ी के व्यापारी भी लेकर जाते थे, लेकिन लॉकडाउन की वजह से गाड़ियां बंद हो गई। कारणवश ना तो व्यापारी आ रहे थे और ना ही मार्केट में हम लोग पान के पत्ते पहुंचा पा रहे थे।

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