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खरमास में वर्जित हैं मांगलिक कार्यःपंडित राजेंद्र नौटियाल

खरमास में वर्जित हैं मांगलिक कार्यःपंडित राजेंद्र नौटियाल
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ऋषिकेश। एएनएन (Action News Network)

सूर्य को सृष्टि में तेज का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रोक्त मान्यता है कि सूर्यदेव की उपासना से यश, कीर्ति, वैभव और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। इसलिए सूर्य उपासना का बड़ा महत्व है। खरमास या मलमास सूर्य से संबंधित हैं। इसलिए इन दिनों में सूर्य उपासना के साथ दान, धर्म और उपासना का विशेष महत्व बतलाया गया है। 14 मार्च को (सूर्यदेव मीन राशि में प्रवेश करेंगे इसलिए 14 मार्च से लेकर 13 अप्रैल तक खरमास रहेगा।

इस अवधि में शहनाई बंद रहेगी। यह कहना है ज्योतिषविद् पंडित राजेन्द्र नौटियाल का।पंडित नौटियाल के अनुसार आज सूर्य ग्रह कुंभ से मीन राशि में प्रवेश करेगा। इस वजह से मलमास शुरू हो जाएगा। 22 मार्च को मंगल ग्रह धनु से मकर राशि, बृहस्पति ग्रह 29 मार्च को राशि बदलकर धनु से मकर व शुक्र 28 मार्च को मेष से वृष राशि में प्रवेश करेगा। 14 अप्रैल से विवाह मुहूर्त 30 जून तक रहेगा।

एक जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास शुरू हो जाएगा। इसके कारण विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं होंगे।उन्होंने बताया खरमास के दौरान जितना संभव हो सके गरीबों, असहायों और जरूरतमंदों को दान करें। सुबह जल्दी उठ जाएं और स्नान आदि से निवृत्त होकर सूर्य को अर्घ्य दें और सूर्य आराधना करें। पंडित राजेंद्र नौटियाल के अनुसार खरमास के दौरान शुभ कार्यों का आयोजन निषेध बताया गया है। इसलिए इन दिनों में मांगलिक कार्य जैसे विवाह, सगाई, गृह निर्माण, गृह प्रवेश, नए कारोबार का प्रारंभ आदि कार्य नहीं करना चाहिए।

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