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मनोज सिन्हा की पराजय पर उठी टीस 'गाजीपुर वालों ने अपने शिल्पी को नहीं अदा की पूरी मजदूरी'

गाजीपुर । एएनएन (Action News Network)

पूर्वांचल के विकास पुरुष के नाम से नवाजे जाने वाले मनोज सिन्हा की पराजय के सदमे से गाजीपुर की जनता उबर नहीं पा रही है। लोकसभा चुनाव के एक वर्ष पूरे होने पर आज 19 मई को पुनः जनपद में सोशल मीडिया पर चहुंओर केवल मनोज सिन्हा के विकास कार्य व उनके पराजय पर संवेदना सम्बंधित पोस्ट की भीड़ लगी हुई है।

गौरतलब हो कि 2014 में गाजीपुर लोकसभा क्षेत्र से तीसरी बार सांसद बने मनोज सिन्हा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रेल राज्य मंत्री के तौर पर काम करने का अवसर प्राप्त हुआ। हालांकि बाद में उन्हें संचार मंत्रालय का भी प्रभार सौंप दिया गया। इस दौरान मनोज सिन्हा द्वारा गाजीपुर में अनवरत विकास कार्य कराए गए। इसके साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश को केंद्र बनाकर मनोज सिन्हा ने व्यापक पैमाने पर रेल संचार के क्षेत्र में काम कराएं। इतना ही नहीं लगातार जनता के बीच में अपनी उपस्थिति बरकरार रखने वाले मनोज सिन्हा जब-जब गाजीपुर में आए कोई न कोई सौगात लेकर ही आते थे। उनके द्वारा जनपद में कराए जा रहे लगातार विकास कार्यो की चर्चा आम जनता से लेकर प्रधानमंत्री तक करते नहीं थकते थे।

पूर्वी उत्तर प्रदेश में रेलवे के आधारभूत संरचना, विस्तारीकरण, दोहरीकरण व विद्युतीकरण से लगायत 1948 से लंबित ताड़ीघाट गाज़ीपुर रेलवे परियोजना को मऊ तक प्रारंभ कराया गया। इसके तहत तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. जवाहरलाल नेहरू के काल से लंबित गंगा नदी पर ताड़ीघाट रेल पुल बनाने की योजना को उन्होंने आरंभ कराया जो अब तक काफी हद तक बनकर तैयार हो गया है। गांव में सोलर लाइट, पेयजलापूर्ति, शौचालय, विद्युतीकरण जैसी मूलभूत सुविधाओं के साथ ही गाजीपुर में राष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं तक की स्थापना कराई गई।

वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान समूचे उत्तर प्रदेश की निगाहें गाजीपुर पर लगी हुई थी और लोग पूर्वांचल के विकास पुरुष कहे जाने वाले गाजीपुर के शिल्पी को पुनः कैबिनेट मंत्री के रूप में देखने की कल्पना भी कर चुके थे। ऐसे में लोगों को गहरा आघात लगा जब 19 मई 2019 को संपन्न हुए लोकसभा चुनाव के बाद 23 मई मतगणना में मनोज सिन्हा सपा बसपा गठबंधन प्रत्याशी अफजाल अंसारी से चुनाव हार गए। इस परिणाम की कल्पना इतनी अप्रत्याशित थी कि केंद्र में भले ही भारी बहुमत के साथ भाजपा की सरकार बनी व नरेंद्र मोदी पुनः प्रधानमंत्री बने लेकिन गाजीपुर के साथ ही समूचे पूर्वांचल में मनोज सिन्हा की पराजय चर्चा का विषय बनी रही।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश के गृह मंत्री अमित शाह से व्यक्तिगत नज़दीकियां मनोज सिन्हा की ईमानदारी, कर्तव्यपरायणता, लोकप्रियता से लोग यह अंदाजा लगाते रहे कि संभवत इन्हें केंद्रीय नेतृत्व द्वारा राज्यसभा के माध्यम से सदन में भेज कर पुनः मंत्री बनाया जाएगा लेकिन यह संभव नहीं हो सका। आज 19 मई 2020 को लोकसभा चुनाव के 1 वर्ष पूरे होने के बाद गाजीपुर जनपद में सोशल मीडिया पर मनोज सिन्हा के पराजय की टीस उभर कर सामने आ गई। जब लोगों ने लिखा कि गाजीपुर वालों ने अपने विश्वकर्मा को पूरी मजदूरी भी नहीं अदा की। वहीं तमाम पोस्टों के माध्यम से वर्तमान सांसद के 1 वर्ष के कार्यकाल का रिपोर्ट भी मांगा जाना शुरू हो गया।
मनोज सिन्हा की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज सोशल मीडिया पर जारी किए जा रहे पोस्टों में सभी दलों व बिरादरी समुदाय के लोग हैं जो मनोज सिन्हा की पराजय को गाजीपुर का दुर्भाग्य बताते हुए अपने निर्णय को कोसते नजर आ रहे हैं।

गाजीपुर का नाम बताने पर प्रवासियों को अब तक सुनने पड़ते हैं ताने

मनोज सिन्हा की पराजय से देश भर में लोगों के प्रतिक्रिया का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि अब तक देश के विभिन्न शहरों में रहकर काम कर रहे लोगों को अपना परिचय गाजीपुर के नाम से बताने पर तत्काल लोगों द्वारा ताने सुनने पड़ जाते हैं। गाजीपुर जनपद के निवासी व केंद्र शासित प्रदेश दमन में प्रतिष्ठित व्यवसाई के रूप में स्थापित भैरव जायसवाल ने बताया कि आज भी लोगों को अपना घर गाजीपुर बताने पर ताने सुनने को मिलते हैं। लोगों द्वारा खुले तौर पर यह ताना दिया जाता है कैसे हैं गाजीपुर वाले जिन्होंने विकास पुरुष को अपना मत नहीं दिया। इसके साथ ही देश के विभिन्न शहरों में भी रहे प्रवासियों को लगातार गाजीपुर का होने के चलते मनोज सिन्हा की पराजय का ताना सुनना आम बात हो गई है।

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