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पिथौरा ब्लाॅक मुख्यालय में मातृ शिशु अस्पताल 2 साल बाद भी प्रारंभ नहीं हो सका

पिथौरा ब्लाॅक मुख्यालय में मातृ शिशु अस्पताल 2 साल बाद भी प्रारंभ नहीं हो सका
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रायपुर। एएनएन (Action News Network)

महासमुंद जिले के पिथौरा ब्लाॅक मुख्यालय में करीब दस करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार 50 बिस्तरों वाला मातृ शिशु अस्पताल 2 साल बाद भी प्रारंभ नहीं हो सका और यहां के लोगों को इसकी सुविधा के लिए भटकना पड़ रहा है। पिथौरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले मरीजों को मातृ शिशु अस्पताल प्रारंभ नहीं होने के कारण आज भी, महासमुंद एवं रायपुर रिफर किया जा रहा है। जिसके कारण क्षेत्र के करीब 300 गांव के लोगों को इसकी सुविधा से वंचित होना पड़ रहा है।

ज्ञातव्य हो कि केंद्र शासन द्वारा करोड़ों रुपए की लागत से पिथौरा ब्लाॅक मुख्यालय में 50 बिस्तरों वाला मातृ शिशु अस्पताल भवन का निर्माण आज से 5 वर्षों पूर्व कराया गया है तथा अस्पताल के भीतर उपयोग होने वाले फर्नीचर से लेकर कमोबेश सभी सामग्रियों की आपूर्ति भी हो चुकी है तथा उक्त सामग्रियां अस्पताल भवन के भीतर पड़े हुए हैं किंतु नए भवन का विधिवत प्रारंभ नहीं हो पाने के कारण इसका लाभ यहां आने वाले मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। लिहाजा आज भी गंभीर मरीजों को महासमुंद एवं रायपुर के निजी एवं शासकीय अस्पतालों का चक्कर काटना पड़ रहा है।

पिथौरा विकासखंड के लगभग 300 गांव के लोगों को इस अस्पताल की सुविधा मिल सके इस लिहाज से भारत सरकार के द्वारा 50 बिस्तरों का अस्पताल का निर्माण कराया गया है, ताकि मातृ एवं शिशु को निशुल्क रूप से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके। किंतु भवन के निर्माण होने के 2 वर्षों बाद भी अस्पताल के विधिवत प्रारंभ नहीं हो पाने के कारण लोगों को आज भी दूरस्थ क्षेत्रों में भटकना पड़ रहा है |

इस मामले को लेकर पूर्व संसदीय सचिव रूप कुमारी चौधरी के प्रतिनिधि मनमीत छाबड़ा ने पत्र के द्वारा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी महासमुंद को ऑनलाइन शिकायत करते हुए अस्पताल को तत्काल प्रारंभ करने की दिशा में पहल करने की अपील की है ताकि माताओं एवं शिशुओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो सकें।

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