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पर्यावरण और आत्मा की एकात्मता को समझने की जरूरत : वी.शांता कुमारी

पर्यावरण और आत्मा की एकात्मता को समझने की जरूरत : वी.शांता कुमारी
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परिवार और पर्यावरण को संरक्षण देने के संकल्प के साथ राष्ट्र सेविका समिति की बैठक सम्पन्न

रांची। एएनएन (Action News Network)

राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय प्रमुख संचालिका वी.शांता कुमारी ने कहा कि भूमि, जल, वायु, जीव-जंतु और वनस्पतियों के रूप में वाह्य पर्यावरण और आत्मा के रूप में आंतरिक पर्यावरण दोनों ही परमात्मा के बनाए हुए हैं। उनकी एकात्मता को समझा जाना चाहिए। इसके नष्ट होने से प्रदूषण होता है। आज पर्यावरण में असंतुलन पैदा हुआ है। इसके हम सब दोषी है। अपनी परंपराओं में वृक्षारोपण एक अति महत्वपूर्ण कार्य माना गया है।

वी.शांता कुमारी सोमवार को राष्ट्र सेविका समिति के तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारिणी की बैठक के समापन मौके पर बोल रही थींं। उन्होंने कहा कि पीपल, बरगद, नीम व तुलसी जैसे पौधे हम हिंदू परंपराओं की चिर प्रगति के प्रतीक चिन्ह हैंं और हमें हर मंगल कार्यों पर पर्यावरण के प्रति अपनी दृष्टि, अपने पीढ़ियों में केंद्रित करने के लिए वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मातृशक्ति गुरु से भी अधिक वंदनीय हैं, क्षमा की प्रतिमूर्ति है, साक्षात ईश्वर का स्वरूप है। विश्व कल्याण की प्रतिमा है। नारी के बिना नर अपूर्ण है। हिंदू संस्कृति का प्रधान केंद्रीय तत्व भाव संवेदना है। उन्होंने कहा कि विश्व में हिन्दू चिंतन ही नारी को सर्वोपरि सम्मान देती है। सेमेटिक मजहब में प्रकृति व स्त्री भोग की वस्तु मानी गई, इससे नैतिक पतन बढ़ा है। भारत की महान संस्कृति का संरक्षक यदि कोई है तो वह अपनी मातृशक्ति ही है।

राष्ट्र सेविका समिति की तीन दिवसीय बैठक में हुए चिंतन में मुख्य बातें उभर कर आयीं। इनमें भारत को परम् वैभव तक ले जाने के लिए कृत संकल्पित बहनों ने अनेक पाठ को आत्मसात किया। इस मौके पर महानगर कार्यवाहिका शालिनी सचदेव, प्रान्त कार्यवाहिका शारदा, संचालिका ऊषा, त्रिपुला एवम अखिल भारतीय अधिकारी सुनीता हलदेकर, अलका ईमानदार, सुलभा देशपांडे सहित सैकड़ों बहनेंं उपस्थित थी। इस मौके पर प्रांगण में एक पौधा भी रौंपा गया।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्र सेविका समिति की तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारिणी की बैठक का शुभारंभ शनिवार को रांची में हुआ था। सरला बिरला विश्वविद्यालय के सभागार में बैठक का उद्घाटन प्रमुख संचालिका शांता अक्का एवं कार्यवाहिका अन्नदानम सीता गायत्री ने किया था। राष्ट्र सेविका समिति एक स्त्रियों की संस्था है, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ही दर्शन के अनुरूप कार्य करती है। लेकिन यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की महिला शाखा नहीं है। इसकी स्थापना 1936 में विजयादशमी के दिन वर्धा में हुई थी।

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