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आर्थर ने प्रिंस के बयान का किया खंडन, कहा- किसी ने वापस लौटने की बात नहीं की थी

आर्थर ने प्रिंस के बयान का किया खंडन, कहा- किसी ने वापस लौटने की बात नहीं की थी
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लंदन । Action India News

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कोच मिकी आर्थर ने एश्वेल प्रिंस के उस बयान का खंडन किया है जिसमें उन्होंने दावा किया है कि अफ्रीकी टीम 2005 के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान नस्लीय दुर्व्यवहार के बाद घर वापस जाना चाहती थी।

प्रिंस ने ट्वीट कर कहा था कि वर्ष 2005 में ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान हम में से कई खिलाड़ियों ने मैदान पर बाउंड्री के पास नस्लवादी टिप्पणी का का सामना किया है।"

प्रिंस ने जिस घटना का उल्लेख किया है वह वर्ष 2005 में दक्षिण अफ्रीका के ऑस्ट्रेलियाई दौरे के पहले टेस्ट के दौरान पर्थ में घटी थी। प्रिंस, मखाया नतिनी और गार्नेट क्रुगर को भीड़ द्वारा नस्लीय टिप्पणी का सामना करना पड़ा था। उस समय, क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका (सीएसए) प्रबंधन ने इसकी आईसीसी के मैच रेफरी क्रिस ब्रॉड से एक आधिकारिक शिकायत की थी।

प्रिंस ने ट्वीट किया, खिलाड़ियों की चिंताओं को खारिज कर दिया गया था। जब हमने लंच के समय इस घटना की जानकारी टीम नेतृत्व को दिया, तो हमें बताया गया," यह भीड़ में शामिल कुछ लोग ही हैं, इसलिए इसकी चिंता न करें।"

हालांकि आर्थर ने प्रिंस के इस बयान को खारिज करते हुए कहा कि टीम प्रबंधन ने इस घटना को गंभीरता से लिया था।

आर्थर ने कहा, "हमने इसके खिलाफ एक स्टैंड बनाया, टीम प्रबंधन क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के पास गया, जिसने बाद टीम के लिए अतिरिक्त सुरक्षा लगाई गई। जहां तक मुझे याद है, इस घटना से पूरी टीम परेशान थी, बावजूद इसके किसी भी खिलाड़ी ने वापस लौटने की बात नहीं की थी। इस घटना ने हमें एक टीम के रूप में बड़े पैमाने पर प्रभावित किया।"

आर्थर ने कहा कि वह ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन के समर्थन में हैं।

बुधवार को इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के क्रिकेटरों ने नस्लवाद के खिलाफ अपनी एकजुटता दिखाने के लिए घुटने टेक दिए थे और एजेस बाउल में तीन मैचों की श्रृंखला के पहले टेस्ट की शुरुआत से पहले 'ब्लैक लाइव्स मैटर' आंदोलन का समर्थन किया था।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका में श्वेत पुलिस अधिकारी की बर्बरता से अफ्रीकी-अमेरिकी मूल के व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद 'ब्लैक लाइव्स मैटर' आंदोलन ने दुनियाभर में गति पकड़ी। दुनियाभर में हो रहे विरोध प्रदर्शन के बीच माइकल होल्डिंग, जेसन होल्डर, डैरेन सैमी जैसे क्रिकेटरों ने भी खुद के साथ हुए भेदभाव के अनुभवों को साझा किया था।

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