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दिहाड़ी पर जीने वाले कैसे चुकाएंगे बैंक की किस्त, प्रभारी मंत्री करेंगे सीएम गहलोत से बात

उदयपुर। एएनएन (Action News Network)

कोरोना के कहर ने उदयपुर सहित पूरे देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। खासकर उन लोगों की हालत खराब हो गई है जो दिहाड़ी पर जीते हैं। इस फेहरिस्त में सिर्फ श्रमिक, थड़ी पर व्यवसाय करने वाले, रिक्शा चालक ही शामिल नहीं है, अब पर्यटन की अर्थव्यवस्था से जुड़े गाइड, टूरिस्ट एजेंसी, ट्रेवल एजेंसी पर कमीशन आधारित काम करने वाले भी शामिल हो गए हैं। इनमें उन लोगों की समस्या और बढ़ गई है जो लोन लेकर रिक्शा चला रहे हैं या किसी न किसी कार्य के लिए छोटा-मोटा लोन ले रखा है।

जब सब कुछ बंद हो चुका है तो इनकी दिहाड़ी भी बंद हो चुकी है और अब उन्हें लोन की किस्त चुकाने की चिंता सताने लगी है। इस मामले को लेकर गुरुवार को उदयपुर जिले के प्रभारी मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल से जब हिन्दुस्थान समाचार ने ध्यान आकृष्ट किया तो उन्होंने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और इस पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ही निर्णय कर सकते हैं।

गुरुवार सुबह सर्किट हाउस में चर्चा करते हुए प्रभारी मंत्री को बताया गया कि उदयपुर के हजारों लोगों की आजीविका पर्यटन व्यवसाय से जुड़ी है। कोरोना के कहर से पुरातात्विक-ऐतिहासिक स्थलों सहित सभी पर्यटन स्थल बंद हो चुके हैं। विदेशी पर्यटकों पर पाबंदी लग चुकी है और देसी पर्यटक भी भ्रमण पर नहीं आने वाले। आशंका है कि अगले एक-दो माह तक यह स्थिति बनी रहेगी। ऐसे में सिर्फ गाइड का ही उदाहरण लें तो रोजाना घर पर 500 से 1500 रुपये ले जाने वाले के हाथ खाली हैं।

ऐसे में उसके सामने घर चलाने की समस्या तो है ही, अभी स्कूलों में प्रवेश फीस का मौसम भी है और यदि उसने लोन ले रखा है तो उसकी किस्त भी उसे चुकानी है। यदि उसने नहीं चुकाई तो बैंक डिफाल्टर की सूची में डाल सकता है जो उसके लिए आगे परेशानी खड़ा करेगा। ऐसे में सरकार इस पर विचार करे कि किस्त माफ न की जाए, लेकिन कोरोना के कहर तक जमा नहीं कराने पर बैंक उसे डिफाल्टर घोषित न करे।

इस सम्बंध में कुछ गाइडों और दिहाड़ी पर जीने वालों का कहना है कि जब सरकार बड़े डिफाल्टरों को मौका दे सकती है, तो इस वक्त की स्थिति जगजाहिर है। ऐसे में सरकार निम्न मध्यमवर्गीय वर्ग के लिए भी कोई ‘बेलआउट’ पैकेज का निर्णय करे तो उन परिवारों को राहत मिलेगी।

इस पर, प्रभारी मंत्री ने कहा कि वे जयपुर पहुंचते ही इस मामले में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से चर्चा करेंगे और सरकार इसका कोई न कोई रस्ता निकालने का प्रयास जरूर करेगी। यह वाकई गंभीर मसला है।

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