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सरकारों का दावा फेल, घर वापसी के लिए पैसा लेकर दिया जा रहा है टिकट

सरकारों का दावा फेल, घर वापसी के लिए पैसा लेकर दिया जा रहा है टिकट
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बेगूसराय । एएनएन (Action News Network)

देश के विभिन्न राज्यों में रह रहे लोगों के घर वापसी की प्रक्रिया काफी तेज हो गई है। बड़ी संख्या में बाहर रहकर काम कर रहे श्रमिक और छात्र स्पेशल ट्रेन से बिहार लौट रहे हैं। सिर्फ बरौनी जंक्शन पर बेगूसराय समेत विभिन्न जिलों के करीब दस हजार छात्र और मजदूर स्पेशल ट्रेन से आ चुके हैं लेकिन इन छात्रों और मजदूरों की घर वापसी में भी बड़ा खेल हो रहा है। केंद्र और रेलवे कहती है कि छात्रों-मजदूरों को मुफ्त में उनके घर पहुंचाया जा रहा है, टिकट का 85 प्रतिशत रेलवे और केंद्र सरकार दे रही है, जबकि 15 प्रतिशत राज्य सरकार को देना है। लेकिन सारी कवायद के बीच मजदूरों और छात्रों को अपने घर आने के लिए टिकट का पैसा अपने जेब से खर्च करना पड़ रहा है। रविवार की देर रात महाराष्ट्र के ठाणे से 1170 लोगों को लेकर जब बरौनी जंक्शन पर स्पेशल ट्रेन पहुंची तो लोगों में घर वापसी की खुशी छा गई।

इन लोगों में आक्रोश भी था कि उन्हें ठाणे से बरौनी तक आने के टिकट के लिए 740 रुपया देना पड़ा। यही हाल आंध्रप्रदेश, सूरत, कोटा और वर्धा से आने वाले छात्रों एवं कामगारों का भी था। इन लोगों को भी टिकट के लिए 615 से 1050 रुपया तक देने पड़े। सवाल है कि जब सभी स्टेशनों के टिकट काउंटर बंद हैंं तो इनके पास टिकट आता कहां से है, कौन पैसा लेकर टिकट देता है, टिकट असली है या नकली? ठाणे से आई ललिता देवी कहती है कि वहां के स्थानीय नेता टाइप के लोग घर-घर आकर पैसा ले गए तथा कल होकर टिकट घर पर पहुंच गया। कोटा से आए मनीष, विवेक एवं सुजीत आदि ने बताया कि जब स्पेशल ट्रेन चलने की बात हुई तो वहां के कुछ दबंग एवं शिक्षा से जुड़े लोगों ने सभी हॉस्टल में आकर घर लौटने के लिए टिकट लेने को कहा और पैसा वसूल कर ले गए। पैसा ले जाने के अगले दिन टिकट दिया गया और जिसने टिकट खरीदा उसे ही निकलने दिया गया है। वर्धा से लौटे रौनक का कहना है कि एक तो आजादी के सात दशक बाद भी सरकार गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षण संस्थान तथा श्रमिकों के लिए रोजगार की व्यवस्था बिहार में नहीं कर सकी है,ऊपर से इस आपदा के समय लूटा जा रहा है।

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