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चीनी मिल के फरमान से पांच हजार से अधिक किसानों में मचा हड़कंप

चीनी मिल के  फरमान से पांच हजार से अधिक किसानों में मचा हड़कंप
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बेगूसराय । एएनएन (Action News Network)

किसानों की दुर्दशा देख सरकार उनकी आय में वृद्धि के लिए लगातार प्रयत्नशील है, इस दिशा में काम भी हो रहे हैं। लेकिन बिहार के हसनपुर में संचालित मगध सूगर एंड एनर्जी लिमिटेड (चीनी मिल) ने एक ऐसा आदेश जारी कर दिया है, जिसके कारण बेगूसराय, समस्तीपुर और खगड़िया जिले के पांच हजार से अधिक किसानों में हड़कंप मच गया है। चीनी मिल प्रबंधन ने सीओपी-2061 का सर्वे (खेत की मापी) करने से इंकार कर दिया है। बिहार सरकार ने आदेश जारी कर इस प्रभेद को निम्न मानते हुए अगले पेराई सत्र 2020-21 के लिए इसे खरीदने का आदेश दिया है लेकिन प्रबंधन दने अपने कर्मचारियों को इस किस्म के गन्ने का सर्वे करने से रोक दिया है। मिल के इस निर्णय के बाद किसानों में भारी आक्रोश है तथा इन लोगों ने राज्यसभा सांसद प्रो. राकेश सिन्हा से गुहार लगाने के साथ-साथ अन्य किस्म का सर्वे कराने से भी इनकार कर दिया है।

भाजपा किसान मोर्चा की जिलाध्यक्ष रामकुमार वर्मा, प्रगतिशील किसान धर्मेंद्र प्रसाद सिंह, किसान सलाहकार अनीश कुमार, मोरतर के किसान रामकिशोर राय, नयानगर के सुधांशु कुमार समेत अन्य किसानों का कहना है कि हसनपुर चीनी मिल के जमादारों द्वारा अपने कार्य क्षेत्र में किसानों को सूचना दी कि पेराई सत्र 2020-21 के लिए सीओपी-2061 गन्ना की मापी करने से मिल प्रबंधन ने मना किया है। जबकि, बिहार सरकार के गन्ना उद्योग विभाग ने 23 अक्टूबर 2019 के आदेश में कहा है कि पेराई सत्र 2019-20 में सीओपी-2061 सामान्य श्रेणी में किया जाएगा तथा अगले पेराई सत्र 2020-21 में केवल इसकी खूंटी की खरीद निम्न श्रेणी में की जाएगी। इसके बाद आगामी वर्षों में इसकी खेती को प्रतिबंधित किया जाएगा। लेकिन हसनपुर चीनी मिल के कार्यपालक अध्यक्ष महताब सिंह ने आदेश दिया है कि 2020-21 से ही सीओपी-2061 गन्ना के किस्म की नापी नहीं की जाएगी।

इसकी जानकारी मिलते ही तीनों जिलों के पांच हजार से अधिक गन्ना उत्पादक किसानों के पैरों तले की धरती खिसक गई है। इससे करोड़ों का गन्ना बर्बाद हो जाएगा। गन्ने की फसल किसान दो या उससे अधिक वर्षों के लिए लगाते हैं और प्रथम वर्ष में पूंजी अत्यधिक लगती है, दूसरे वर्ष में फायदा होता है। एक तरफ वैश्विक महामारी कोरोना के चलते किसान परेशान हैं। इनकी आय का अन्य कोई साधन नहीं है। दूसरी ओर हसनपुर मिल के इस फरमान ने किसानों की पीड़ा को और बढ़ा दी है। किसानों ने ऑनलाइन संवाद कर निर्णय लिया है कि हम सरकार विरोधी रवैया अपनाने वाली हसनपुर चीनी मिल के मौखिक आदेश को नहीं मानेंगे और जब तक सीओपी-2061 की मापी नहीं की जाएगी, अपने किसी भी किस्म के गन्ने की नापी नहीं कराएंगे।

किसानों ने आरोप लगाया है की वर्तमान वर्ष में हसनपुर चीनी मिल ने सीओपी-2061 का भुगतान अभी तक नहीं किया है, ताकि किसान प्रताड़ित हों और इसकी खेती नहीं करें। किसानों ने बताया कि इस वर्ष 2061 गन्ना की नई खेती किसी भी पंचायत में नहीं हुई है, हमारी जो खूंटी फसल लगी हुई है उसे कम से कम दो वर्षों तक हसनपुर चीनी मिल को लेना चाहिए। किसानों ने राज्यसभा सांसद प्रो. राकेश सिन्हा को आवेदन देकर चीनी मिल द्वारा किसानों के साथ लगातार किए जा रहे शोषण पर रोक लगवाने की गुहार लगाई है। इन लोगों का कहना है कि चीनी मिल सरकारी गाइडलाइन के अनुसार काम करे और पूर्व में दिए गए गन्ने की कीमत का अविलंब भुगतान करे।

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