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मुस्लिम महिलाओं ने जमकर उड़ाया अबीर गुलाल, खेली होली

मुस्लिम महिलाओं ने जमकर उड़ाया अबीर गुलाल, खेली होली
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  • मुस्लिम महिला फाउण्डेशन के 'चला होली खेलल जाय' कार्यक्रम में दिया साम्प्रदायिक सौहार्द्र का सन्देश

वाराणसी। एएनएन (Action News Network)

बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में सोमवार को लमही इन्द्रेश नगर स्थित सुभाष भवन में मुस्लिम महिलाओं ने अबीर गुलाल, गुलाब की पंखुड़ियों को उड़ाते हुए जमकर होली खेली। इस दौरान हिन्दू महिलाओं के साथ होली गीत गाकर समाज में साम्प्रदायिक सौहार्द्र का सन्देश भी दिया। मुस्लिम महिला फाउण्डेशन की ओर से आयोजित 'चला होली खेलल जाय' कार्यक्रम में महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्य और फैसलों को भी सराहा।

होली गीत में होली खेलैं मोदी जी हिन्द में, मोदी जी...लगाइके लाल गुलाल, 370 खतम कराये, मोदी जी...हरा गुलाल हवा में उड़ायें, पाकिस्तान को यूं निपटायें, मोदी जी...सीएए से शरण दिलायें, राम जी को अयोध्या में बिठाये, मोदी जी...लगाइके लाल गुलाल, तीन तलाक से मुक्ति दिलाये, मोदी जी...गाकर महिलाओं ने जमकर नृत्य भी किया।

इस मौके पर फाउण्डेशन की नेशनल सदर नाजनीन अंसारी ने कहा कि पिछले 10 वर्षों से मुस्लिम महिलायें होली खेलकर साम्प्रदायिक सौहार्द्र का सन्देश दे रही हैं। रंगों का पर्व होली समरसता, एकता, छूआछूत मुक्ति और मोहब्बत का त्यौहार है। जब हिन्दू-मुसलमान मिलकर इस त्यौहार को मनायेंगे तो कट्टरपंथियों को नफरत फैलाने का मौका नहीं मिलेगा। रंगों में सराबोर होने से ही हम एक होते हैं वो चाहे राम के रंग में हो या अल्लाह की मोहब्बत में।

उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में काशी की होली निराली है। यहां भूत भावन भगवान शिव श्मशान में चिता की भस्म से होली खेलते हैं तो काशीवासी प्रेम के रंग से न सिर्फ सराबोर होते हैं बल्कि दुनिया भर को शांति, सौहार्द्र का संदेश देते हैं। दिल्ली दंगों से उपजे नफरत की आग को काशी की मुस्लिम महिलाओं ने सौहार्द्र के रंग से न सिर्फ ठंडा कर दिया बल्कि दिलों को जोड़ने का भी संदेश दिया। कार्यक्रम में विशाल भारत संस्थान के संस्थापक डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं का यह प्रयास पूरी दुनिया को संदेश देने वाला है। धर्म के नाम पर हिंसा करने वालों को यह शांति का संदेश है।

भारत की सांझा विरासत तीज त्यौहारों को मिल जुलकर मनाने से बनी है। कार्यक्रम में नजमा परवीन, अर्चना भारतवंशी, डॉ. मृदुला जायसवाल, सोनी अंसारी, नगीना बेगम, जुबैदा, नूरजहां, शमसुननिसा, शबनम बानो, रूखसार, शहनाज, रूखसाना, रशीदा, जमीला, जुलेखा, मेहनाज, मुन्नी बेगम, सोनी बेगम आदि ने बढ़चढ़ कर सहभागिता की।

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