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नैनीताल में कोरोना से भी बड़ा खतरा, नैना पीक चोटी में दरार का वीडियो वायरल

नैनीताल में कोरोना से भी बड़ा खतरा, नैना पीक चोटी में दरार का वीडियो वायरल
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  • सबसे ऊंची नैना पीक चोटी की तलहटी में है उत्तराखंड हाईकोर्ट और उत्तराखंड प्रशासन अकादमी

  • पूर्व में हुए भूस्खलन पर हाईपावर कमेटी लॉक डाउन की वजह से सर्वेक्षण शुरू नहीं कर पाई

नैनीताल । एएनएन (Action News Network)

कोरोना काल और लॉक डाउन के बीच जिला व मंडल मुख्यालय तथा उत्तराखंड का हाईकोर्ट होने के नाते प्रदेश की न्यायिक राजधानी व विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी बड़े खतरे के मुहाने पर है। यहां की सबसे ऊंची नैना पीक चोटी पर उभरी एक बड़ी दरार का वीडियो वायरल हुआ है। इससे नैना पीक चोटी पर भूस्खलन की आशंका बढ़ गई है। यह वीडियो करीब एक-डेढ़ माह पहले का बताया जा रहा है। हालांकि समस्या पुरानी है, किंतु यह नये रूप में उभर रही है। चिंताजनक पहलू यह भी है कि लॉक डाउन की वजह से पिछले दो माह से अधिक लंबे समय से नगर की इस समस्या पर किसी का ध्यान नहीं है।

देखें दरार का वीडियो :https://www.youtube.com/watch?v=Aax8P34R1BEयह वीडियो नगर के उमेश पंत, संतोष असवाल, सुरेंद्र बिष्ट व कन्नू आदि युवाओं ने बनाया है। उमेश पंत ने बताया है कि सत्य नारायण मंदिर की ओर से नैना पीक जाने के रास्ते में आने वाली दूसरी पहाड़ी पर करीब 50-60 फीट की लंबाई में उन्होंने करीब आधा फीट चौड़ी दरार देखी और इसका वीडियो बनाया। लेकिन इसकी भयावहता को सोचकर वे इस वीडियो को किसी को भेजने से डर गए। इधर रविवार को यह कहीं से वायरल हो गया। नैना पीक समुद्र सतह से 2610 मीटर ऊंची चोटी है। इस चोटी के नीचे ही उत्तराखंड हाईकोर्ट एवं उत्तराखंड प्रशासन अकादमी जैसे बड़े संस्थान व कई बड़े होटल स्थित हैं। इस क्षेत्र में हाईकोर्ट के न्यायाधीशों सहित बड़ी आबादी निवास करती है। इस क्षेत्र में भूस्खलन का लंबा इतिहास है। बताया जाता है इस चोटी का एक हिस्सा 90 के दशक में भरभरा गया था। इसमें तत्कालीन ब्रुक हिल हॉस्टल (वर्तमान हाईकोर्ट का हिस्सा), पंत सदन (वर्तमान मुख्य न्यायाधीश की कोठी), गैस गोदाम, स्विस होटल व शेरवानी होटल आदि क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुए थे।

https://www.youtube.com/watch?v=Aax8P34R1BE

इधर इस वर्ष 29 जनवरी और फिर दो फरवरी को भी चाइना पीक की पहाड़ी में भूस्खलन हुआ था। इसके बाद जिला प्रशासन की टीम ने लोक निर्माण विभाग, जीएसआई, आपदा प्रबंधन और भू-वैज्ञानिकों के साथ मिलकर टूटी पहाड़ी का निरीक्षण कर मैपिंग के आधार पर पहाड़ी का ट्रीटमेंट किये जाने की बात कही थी। मामला शासन में भी पहुंचा था, लेकिन अब तक कोई कार्य शुरू नही हो पाया है। आपदा प्रबंधन अधिकारी शैलेश कुमार ने कहा कि उन्हें भूस्खलन की सूचना नहीं मिली है, परंतु नैना पीक चोटी का पूरा क्षेत्र ही भूस्खलन की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील हो गया है। इस पर भूस्खलन होने से इंकार नहीं किया जा सकता। अलबत्ता, उन्होंने फिलहाल इससे आबादी क्षेत्र में कोई नुकसान होने की संभावना से इंकार किया है। उन्होंने बताया कि कोरोना काल की वजह से यहां होने वाली जांचें अभी शुरू नहीं हो पाई हैं।एसडीएम विनोद कुमार ने बताया कि उनके स्तर से की गई जांच के बाद शासन को भेजी गई रिपोर्ट पर मुख्य सचिव के स्तर से नैना पीक चोटी के संरक्षण कार्यों के लिए जांच के लिए हाईपावर कमेटी गठित की गई है। कमेटी में वाडिया इंस्टीट्यूट सहित अन्य भूवैज्ञानिक शामिल हैं। कमेटी को पूरा अध्ययन कर विस्तृत रिपोर्ट देनी है। किंतु लॉक डाउन की वजह से संभवतः कोई कार्य नहीं हो पाया है।

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