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देर रात ‘लॉक डाउन’ में गूंजा ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’

देर रात ‘लॉक डाउन’ में गूंजा ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’
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उदयपुर । Action India News

कोरोना महामारी के संकटकाल की पाबंदियों के चलते उदयपुर 9 बजे बाद बंद हो गया, मध्यरात्रि के समय गलियों में दूर-दूर तक कोई नजर नहीं आ रहा था, पूरा शहर सन्नाटे के आगोश में था, लेकिन ज्योंही घड़ी ने मध्य रात्रि के साढ़े बारह का समय हुआ, उदयपुर के प्रसिद्ध जगदीश मंदिर से उठी शंख ध्वनि ने पूरे शहर को अहसास करा दिया कि लल्ला का जन्म हो गया है, पलना में ललना प्रकट हो गए हैं और घंटानाद होने लगा, ढोल बजे, आतिशबाजी भी हुई और साथ में गूंजा ‘हाथी घोड़ा पालकी, जै कन्हैया लाल की’, ‘नंद के आनंद भयो, जै कन्हैया लाल की।

जी हां, लॉक डाउन में भक्तों ने घरों से ही उन्हें नमन करते हुए इस कोरोना महामारी के नाश की कामना की। मंदिर में पुजारी परिवार के सीमित लोगों ने देवस्थान विभाग के निर्देशानुसार कृष्ण जन्म की झांकी की परम्परा निभाई। गजेन्द्र पुजारी ने मुख्य आरती की। पुजारी परिवार के लोगों ने ही कृष्ण स्तुति का गायन किया और जन्म की बधाई भी गाई और आपस में कृष्ण जन्म की बधाई देते हुए प्रसाद बांटा।

मंगलवार को स्मार्त सम्प्रदाय के अंतर्गत आने वाले जगदीश मंदिर में जन्माष्टमी मनाई गई। यहां नंद उत्सव बुधवार को होगा। जबकि, पुष्टिमार्गीय और निम्बार्क परम्परा में जन्माष्टमी बुधवार को मनाई जाएगी और नंद उत्सव गुरुवार को होगा। कोरोना महामारी के कारण सिर्फ मंदिरों के पुजारियों को ही भगवान की परम्पराओं को निभाने की अनुमति है। कोरोना संक्रमण से बचाव के मद्देनजर दर्शनार्थियों के प्रवेश पर पाबंदी रखी गई है।

राजसमंद जिले में स्थित पुष्टिमार्गीय प्रधान पीठ नाथद्वारा में भी जन्माष्टमी बुधवार को मनाई जाएगी, लेकिन उसका स्वरूप भी संक्षिप्त ही रखा जाएगा। हालांकि, जन्माष्टमी पर छोटे-बड़े सभी मंदिरों पर रंग-बिरंगी आकर्षक विद्युत सजावट की गई है। आधुनिक काल में जन्मदिन के प्रतीक माने जाने लगे रंग-बिरंगे गुब्बारे भी सजाये गए हैं।

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