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71 वर्ष उम्र में आज भी पहाड़ों के लिए चिंतित हैं नेगी दा

71 वर्ष उम्र में आज भी पहाड़ों के लिए चिंतित हैं नेगी दा
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  • 12 अगस्त 49 को पौड़ी गांव में हुआ था नेगी दा का जन्म

  • कोरोना काल में इन दिनों गांव में रहकर कर रहे सृजन

देहरादून । Action India News

अपने गीतों से पहाड़ को कभी हंसाने, कभी रूलाने और कभी झकझोरने वाले नरेंद्र सिंह नेगी यानी अपने नेगी दा की उम्र 71 वर्ष हाे गई है लेकिन वे आज भी पहाड़ के लोगों की समस्याओं और उनके भविष्य के लिये चिन्तित हैं। 12 अगस्त 1949 को पौड़ी गांव में जन्मे नेगी दा ने आज कोरोना संकट में अपना जन्मदिन गांव की शांत वादियों में बहुत सादगी से मनाया।

उन्हें फोन और सोशल मीडिया पर बधाई देने वालों का तांता लगा है। नेगी पिछले पांच महीने से पौड़ी गांव में ही हैं, हालांकि उनका देहरादून में भी घर है। वह नया लिखने, नया कुछ करने के लिए आज सक्रिय हैं। पहाड़ के प्रति उनकी चिंता वही पुरानी है।अभी ज्यादा वक्त नहीं बीता है, जबकि नेगी दा मौत को हराकर लौटे थे।

दो साल पहले हार्ट अटैक के बाद देहरादून के अस्पताल में नेगी दा कई दिन भर्ती रहे थे। इसके बाद वे स्वस्थ हुए और फिर से अपनी कला-संगीत की यात्रा में लौट आये थे। इस दौरान उन्होंने देश और विदेशों तक में कई प्रोग्राम किये। पहाड़ के सौंदर्य, यहां के लोगों की दुख-तकलीफ, त्यौहार, लोक जीवन नेगी दा के गीतों का सब हिस्सा बने हैं।

खुद कलम चलाई है, जब कुछ लिखा गया, तो उस पर धुन बनाई और फिर उसे स्वर दे दिया। दरअसल, पहाड़ी लोक संस्कृति में परंपराओं और आधुनिकता दोनों का ध्यान रखते हुए नेगी दा आगे बढे़ हैं। उन्होंने अपने गीतों में प्रयोग भी खूब किए और पुरानी चीजों को बेहद संवारकर सामने रखा है।

एक्शन इंडिया समाचार ने जब नेगी दा को उनके जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं, तो उन्होंने खुले मन से इसे स्वीकार किया और आभार जताया। नए प्रोजेक्ट के सवाल पर हंसते हुए कहा कि अब तो नए लोगों को करना है। मगर फिर कहा- उत्तराखंड की तमाम चुनौतियों अब भी बरकरार हैं। उसके लिए सामूहिक और ईमानदार प्रयास जरूरी हैं।

लोक कलाकारों पर इस संबंध में बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।नेगी दा कोरोना काल में अपने पौड़ी गांव स्थित पैतृक घर में अपने परिजनों के साथ हैं। कोरोना काल में लोगों को जागरूक करने के लिए उनके कई वीडियो सामने आए हैं। वैसे, नेगी दा को जब जब कुछ अलग लिखना रहा, वह अपने गांव या पहाड़ के दूरस्थ शांत इलाकों का रूख करते रहे हैं। उनके प्रशंसकों को उम्मीद है कि कोरोनाकाल खत्म होने के बाद नेगी दा का नया सृजन उनके सामने जरूर आएगा।

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