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राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने शिमला में नवाजे आईएएएस प्रशिक्षु अधिकारी

राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने शिमला में नवाजे आईएएएस प्रशिक्षु अधिकारी
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शिमला। एक्शन इंडिया न्यूज़


राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द शनिवार को शिमला में राष्ट्रीय लेखा परीक्षा तथा लेखा अकादमी द्वारा आयोजित भारतीय लेखा परीक्षा एवं लेखा सेवाएं बैच 2018 और 2019 के प्रशिक्षु अधिकारियोें के विदाई समारोह के अवसर पर मुख्यातिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने मेधावी प्रशिक्षु अधिकारियों को पद्क प्रदान किए।


इस दोैरान अधिकारी प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि लोक सेवकों के रूप में वे सबसे गरीब लोगों की सेवा करने और उनके चेहरे पर मुस्कान लाने में सक्षम होने पर सबसे अधिक संतुष्टि प्राप्त करेंगे। अपने संवैधानिक कर्तव्य का पालन करते हुए हमें सभी पदाधिकारियों को सौंपी गई इस सामान्य जिम्मेदारी के प्रति हमेशा सचेत रहना चाहिए। पारस्परिक सहानुभूति से लदी एक दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करेगा कि हम अपने राष्ट्रीय लक्ष्यों तक बहुत तेजी से पहुंचें।


राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान में निहित स्वतंत्रता को पोषित किया जाना चाहिए। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि व्यावसायिकता और पूर्ण सत्यनिष्ठा के माध्यम से इसमें और अधिक मूल्यों को जोड़ने की आवश्यकता है। सभी युवा अधिकारियों को इन गुणों को पूरी तरह से आत्मसात करने की आवश्यकता है, क्योंकि वे लेखा परीक्षा और लेखा विभाग की ऐसी समृद्ध परंपराओं के अग्रदूत बन जाते हैं।

उन्होंने कहा कि सीएजी ने पर्यावरण लेखा परीक्षा के क्षेत्र में क्षमता निर्माण के उपाय किए हैं। यह हमारे भविष्य के लिए बहुत ही स्वागत योग्य कदम है। हमेशा यह याद रखना चाहिए कि संसाधन परिमितता की बाधाओं को केवल मानव नवाचार द्वारा ही आंशिक रूप से संबोधित किया जा सकता है। बाकी के लिए हमारी पीढ़ी द्वारा बलिदान ही एकमात्र सहारा है। हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए किए जाने वाले बलिदानों के बारे में जागरूक करने में सीएजी की बड़ी भूमिका है।


राष्ट्रपति ने कहा कि निरीक्षण कार्य करते समय सीएजी को प्रणालीगत सुधारों के लिए इनपुट प्रदान करने के अवसरों के बारे में पता होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लेखापरीक्षा कार्य प्रणाली की गहरी समझ हासिल करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करते हैं और सीएजी को सुधारों का सुझाव देने की एक अच्छी स्थिति में रखते हैं। सरकारें सीएजी जैसी संस्था द्वारा दी गई सलाह को गंभीरता से लेंगी।


भारत की प्रथम महिला सविता कोविन्द, राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी इस अवसर पर उपस्थित थे। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक गिरीश चन्द्रा मुरमू ने राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री का स्वागत किया।

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