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महिलाओं को गर्भाशय में भी हो सकता टीबी - डॉ नमिता

महिलाओं को गर्भाशय में भी हो सकता टीबी - डॉ नमिता
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फर्रुखाबाद। एक्शन इंडिया न्यूज़

महिलाओं के गर्भाशय में भी टीबी हो सकती है। टीबी एक ऐसी बीमारी है जो बैक्टीरिया की वजह से होती है।अब आमतौर पर लगता है कि ये बीमारी फेफड़ों में होती है। पर ये सही नहीं है। टीबी कहीं भी हो सकता है। ख़ासतौर पर औरतों को। यह कहना है जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुनील मल्होत्रा का।

डीटीओ ने कहा कि टीबी प्रजनन करने बाले अंग में भी हो सकता है। यानी वो सारे अंग जो बच्चा पैदा करने में आपकी मदद करते हैं। इस बारे में डॉ राममनोहर लोहिया चिकित्सालय में तैनात स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नमिता दास का कहना है कि 'इस तरह के टीबी को पेल्विक ट्यूबरक्लोसिस कहते हैं।इस तरह का टीबी महिलाओं के प्रजनन अंग में होता है ।जैसे कि आपके गर्भाशय और उससे जुड़े फैलोपियन ट्यूब में भी यह रोग हो सकता है।

डॉ. नमिता ने कहा कि माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस ये एक तरह के जीवाणु होते हैं। यही सारी मुसीबत की जड़ हैं। मतलब शरीर में इनकी एंट्री और टीबी की शुरुआत, अगर शरीर के किसी और हिस्से में ये बैक्टीरिया घर कर जाए तो ये आपके प्रजनन अंग तक पहुंच सकते हैं। डॉ नमिता कहती हैं कि शुरुआती दौर में इस तरह के टीबी का पकड़ में आना थोड़ा मुश्किल होता है।कई लोग इसे कैंसर भी समझ लेते हैं, पर ये कैंसर नहीं है। ये तब सामने आता है जब औरत चाहकर भी मां नहीं बन पा रही होती।

इसके कुछ लक्षण थकान, हल्का बुखार, पेट के निचले हिस्से में दर्द रहना, वजाइना से सफ़ेद पानी निकलना, पीरियड्स ठीक समय पर न होना होते हैं।

उनका कहना है कि इसके बारे में जानने के लिए एक टेस्ट होता है, इसे कहते हैं ट्यूबरकुलीन स्किन टेस्ट। ये शरीर में किसी भी हिस्से में होने वाले टीबी के बारे में पता लगा लेता है। पेट के निचले हिस्से का अल्ट्रासाउंड भी इस बीमारी का पता लगा सकता है। इसलिए ज़रूरी है कि अगर आपको बताए गए सारे लक्षण महसूस हो रहे हैं तो डॉक्टर से मिलिए। पेल्विक ट्यूबरक्लोसिस का इलाज इस पर निर्भर करता है कि कंडीशन कितनी सीरियस है, दवाइयों से लेकर सर्जरी तक की जा सकती है।

पेल्विक ट्यूबरक्लोसिस को प्रजनन अंग तक आने से रोकने का तरीका है, यह सुनिश्चित करना होगा कि शरीर के किसी और हिस्से में टीबी तो नहीं है, वरना उसके फैलने की संभावना अधिक हैं। टीबी फैलने वाली बीमारी है, इसलिए ज़रूरी है कि उन लोगों से थोड़ा दूर रहें जिन्हें टीबी है। दूरी का मतलब उनका जूठा खाना न खाएं।वो खांसे या छींके तो दूरी बना लें। उन्होंने बताया कि लगभग 17.4% महिलाओं के प्रजनन अंगों में टीबी हो जाती है। यह महिलाओं के फैलोपियन ट्यूब में लगभग 90 से 100 प्रतिशत, गर्भाशय में 50 से 60 प्रतिशत और ओवरी में 20 से 30 प्रतिशत तक टीबी हो सकती है।

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