Action India

फीस वसूलने निजी स्कूलों का अब नया पैंतरा, ऑनलाइन क्लास के पासवर्ड किए ब्लॉक

फीस वसूलने निजी स्कूलों का अब नया पैंतरा, ऑनलाइन क्लास के पासवर्ड किए ब्लॉक
X

उदयपुर । एएनएन (Action News Network)

निजी स्कूलों ने कोरोना काल की फीस वसूलने के लिए नया पैंतरा अपना लिया है। बच्चों को अब तक ऑनलाइन कक्षाओं की ओर मोड़ चुके स्कूलों ने फीस वसूलने के लिए अब उनके ऑनलाइन आईडी बंद कर दिए हैं।

आईडी बंद करना यानि सीधे-सीधे बच्चों को पढ़ाई से वंचित करना है, जबकि 14 मई को राजस्थान उच्च न्यायालय जयपुर ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि प्रभावित अवधि की फीस जमा नहीं होने पर किसी भी बच्चे का नाम नहीं काटा जा सकता, जिसके मायने यह है कि उसे शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता।

उल्लेखनीय है कि निजी स्कूलों की कोरोना काल के तीन महीनों की फीस के मामले को लेकर देश के आठ राज्यों की हाईकोर्ट में वाद दाखिल हो चुके हैं। राजस्थान में 14 मई को आए उच्च न्यायालय के आदेश में भी 9 अप्रैल 2020 के सरकार के नीतिगत निर्णय का जिक्र करते हुए अपने आदेश में आगे जोड़ा है कि प्रभावित अवधि की फीस जमा नहीं करने पर किसी भी बच्चे का नाम स्कूल से नहीं काटा जा सकता है।

इसका अर्थ सीधा है कि किसी भी बच्चे को पढ़ाई से वंचित नहीं किया जा सकता है, जबकि ऑनलाइन आईडी बंद करना एक तरह से पढ़ाई से वंचित करना है। इधर निजी स्कूलों का भी कहना है कि कई ऐसे अभिभावक हैं जिन्होंने पिछले सत्र की फीस भी नहीं दी है।

ऐसे अभिभावकों को कई बार पिछले सत्र की फीस जमा कराने का आग्रह किया गया है, लेकिन वे कोरोना की आड़ लेकर बैठे हैं। फीस आएगी तो स्कूल अपने कार्मिकों-शिक्षकों को वेतन दे पाएंगे। ऐसे में स्कूलों के लिए पिछले सत्र की बकाया के साथ बीते तीन महीनों की भी फीस लेना भी अब जरूरी हो गया है।

इस सारे मामले में उदयपुर के मुख्य शिक्षा अधिकारी शिवजी गौड़ ने स्पष्ट किया है कि निदेशालय के आदेश में सिर्फ तीन माह की फीस को स्थगित करने की बात है, फीस माफी की नहीं। हां, उन्होंने इतना जरूर कहा कि बच्चों का सरकारी स्कूल में स्वागत है।

लेकिन, वहां भी प्रवेश के लिए टीसी तो चाहिए और अभिभावक को टीसी भी तभी मिल सकेगी जब अभिभावक निजी स्कूल की बकाया फीस जमा कराएंगे। जहां तक किस्तों में भुगतान का मसला है यह पूरी तरह से निजी स्कूल प्रबंधन और अभिभावक के बीच का विषय है, इसमें विभाग की कोई भूमिका नहीं है।

निजी स्कूलों ने आईडी बंद करने का नया पैंतरा भी उस वक्त काम में लिया है जब एक जुलाई हो चुकी है और अब सरकारी स्कूलों में भी प्रवेश की प्रक्रिया के ज्यादा दिन नहीं बचे हैं। ऐसे में अभिभावक को हर हाल में फीस चुकानी ही है, चाहे वह स्कूल में पढ़ाना चाहे या टीसी लेना चाहे।

इधर, सरकारी अंग्रेजी मीडियम हुआ ‘हाउसफुल’

उदयपुर के धानमण्डी का महात्मा गांधी सरकारी अंग्रेजी मीडियम स्कूल हाउसफुल हो चुका है। यहां इतने प्रवेश के आवेदन निर्धारित सीटों से ज्यादा आ गए तो स्कूल को लॉटरी का सहारा लेना पड़ा।

स्कूल ने सभी कक्षाओं में प्रवेश की सूची चस्पां कर दी है। यहां 9वीं कक्षा में जरूर 5 सीटें खाली रह गई हैं। स्कूल का कहना है कि इस सत्र में उनके पास कई निजी स्कूलों के बच्चों ने प्रवेश के लिए आवेदन किया था।

Next Story
Share it