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जवाई से पानी के बंटवारे पर सताने लगी अगले साल की चिंता

जवाई से पानी के बंटवारे पर सताने लगी अगले साल की चिंता
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पाली । Action India News

पश्चिमी राजस्थान के सबसे बड़े जलस्रोत जवाईबांध से रबी फसल के लिए कमांड क्षेत्र में सिंचाई के अलावा पेयजल के लिए पानी का बंटवारा तो हो गया, लेकिन जिस तरह से पानी का बंटवारा किया गया है, उससे अगले साल पीने के पानी की चिंता सताने लगी है।

हालांकि, जिला प्रशासन के निर्देश पर जलदाय विभाग पीने के लिए मिले पानी का एक्शन प्लान तैयार कर रहा है, लेकिन बांध में उपलब्ध 6192.51 एमसीएफटी पानी में से पेयजल के लिए आरक्षित 2192.51 एमसीएफटी पानी अगले मानसून तक जिले की प्यास बुझा सकेगा, इसमें संशय है। किसानों को बांध से सिंचाई के लिए चार पाण में 4 हजार एमसीएफटी पानी दिया जाएगा।

जवाईबांध से बीते साल 2586 एमसीएफटी पानी पेयजल के लिए आरक्षित किया गया था। इसमें से 2363 एमसीएफटी पानी उपयोग में लिया गया। बावजूद इसके, मानसून के आने तक बांध का पानी रीत गया और पाली शहर समेत आस-पास के गांवों की प्यास बुझाने के लिए वॉटर ट्रेन चलानी पड़ी थी। अभी बांध से 563 गांवों समेत 8 शहरों में पानी की आपूर्ति की जा रही हैं।

कई गांवों को अभी विस्तार योजना में जवाई योजना से जोडऩा हैं। इस कारण इस बार अतिरिक्त पानी की जरुरत पड़ेगी। बांध से इस साल पेयजल के लिए जितना पानी आरक्षित किया गया है, उससे आगामी मानसून तक प्यास बुझाने के अलावा छीजत व वाष्पीकरण को रोकना भी जलदाय विभाग के लिए बड़ी चुनौती रहेगी।

जवाईबांध में अभी 6192 एमसीएफटी पानी उपलब्ध है। इस साल मानसून कमजोर रहने की वजह से बांध में पर्याप्त पानी की आवक नहीं हो सकी। बांध से सिंचाई के लिए आरक्षित किए गए चार हजार एमसीएफटी पानी से कमांड क्षेत्र की 38 हजार 671 हैक्टेयर भूमि में सिंचाई हो सकेगी। पिछले साल तत्कालीन संभागीय आयुक्त बाबूलाल कोठारी की अध्यक्षता में जवाई डाक बंगले में जल वितरण समिति की बैठक हुई थी।

इसमें सरकार की ओर से 3300 एमसीएफटी पानी देने की बात कही गई थी। लेकिन, किसान प्रतिनिधि 3400 एमसीएफटी पानी देने की बात पर अड़ गए थे। आखिर में 3350 एमसीएफटी पानी देने पर सहमति बनी थी। किसान संघर्ष समिति अध्यक्ष जयेन्द्रसिंह गलथनी का कहना है कि समझौते के अनुसार 4000 एमसीएफटी पानी चार पाण में दिया जाएगा। प्रत्येक पाण 20-20 दिन की रहेगी।

जिला कलक्टर अंशदीप का कहना है कि जल वितरण समिति अपना फैसला कर चुकी है, इसलिए इसमें किसी तरह का फेरबदल तो नहीं किया जा सकता। लेकिन, पेयजल के लिए जितना भी पानी आरक्षित किया गया है उसमें आगामी मानसून तक जिले की प्यास बुझाने के लिए जलदाय विभाग को एक्शन प्लान बनाने के लिए कहा गया है। यह सोमवार तक तैयार हो जाएगा। इसके बाद रणनीति बनाकर पेयजल के लिए आरक्षित पानी का उपयोग किया जाएगा।

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