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निराला का साहित्यिक उन्मेष व नई चेतना हिन्दी साहित्य का प्रस्थान बिन्दु : मलिक

निराला का साहित्यिक उन्मेष व नई चेतना हिन्दी साहित्य का प्रस्थान बिन्दु : मलिक
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प्रयागराज। एएनएन (Action News Network)

महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ ने बंधी बंधाई साहित्यिक मान्यताओं को तोड़कर युग और समय के अनुसार काव्य और कहानी दोनों ही क्षेत्रों में नई राह का निर्माण किया। उनका साहित्यिक उन्मेष और नई चेतना हिंदी साहित्य का ऐतिहासिक प्रस्थान बिंदु है।

उक्त विचार उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय में अपर महाप्रबंधक अरुण मलिक ने सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ की जयंती के उपलक्ष्य आयोजित साहित्यिक संगोष्ठी में व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि निराला छायावाद के प्रतिनिधि कवि हैं, लेकिन उनकी भाव व्यंजना और शैली विधान दोनों ने ही बाद के प्रगतिवाद, प्रयोगवाद, नई कविता तथा गीत एवं प्रगीत काव्य के महत्वपूर्ण कवियों को अनुप्रेरित और प्रभावित किया है।

कहा कि निराला परिवर्तन और नवीनता के गायक हैं। हम कह सकते हैं कि आज हमारे राष्ट्रीय, सामाजिक, आर्थिक, व्यावसायिक और व्यक्तिगत जीवन सहित विभिन्न क्षेत्रों में शक्ति की ऐसी ही मौलिक कल्पना और नवीनता की जरूरत है, ताकि हम राष्ट्र एवं समाज के निर्माण में रचनात्मक भूमिका निभा सकें।

मुख्य राजभाषा अधिकारी महेन्द्र नाथ ओझा ने कहा कि निराला लघुता और प्रभुता दोनों के कवि हैं। ’जूही की कली’, ’बादल राग’, ’जागो फिर एक बार’, ’वह तोड़ती पत्थर’ जैसी रचनाएं सांस्कृतिक चेतना, काव्य सौदर्य के प्रतिमान और वैक्तिक एवं समाजिक संघर्ष के संगमित रचनाविधान के अनुपम दृष्टांत हैं।

उन्होंने बताया कि ’वह तोड़ती पत्थर’ विलासता में निमग्न सौंदर्य चेतना के विरूद्ध समाजिक संघर्ष और वर्ग बोध की कविता है। निराला के ’बादल राग’ में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के भटके हुए सुरों की अन्विति देखी और सुनी जा सकती है। ’वीणावादिनी वर दे’ केवल आराधन का गीत नहीं है, यह देश और समाज में नवता और अमृत मंत्र के आपूरण के आह्वान का स्वर है।

मुख्य मोटिव पावर इंजीनियर अनिल द्विवेदी ने कहा कि निराला एक साथ सौदर्य, प्रकृति, आम आदमी, पुत्री के शोक में व्याकुल अपने दुःख बोध को व्यापक मूल्य संचेतना से जोड़ते हुए एक व्याकुल कवि पिता की मार्मिक अभिव्यक्ति के कवि हैं। वे ’बादल राग’ के गायक हैं। उनकी प्रसिद्ध कविता ’कुकुरमुत्ता’ का बहुत बड़ा आर्थिक और समाजिक कैनवस है। निराला ने ’सरोज स्मृति’ के माध्यम से कुलीन विद्रूपताओं पर करारा प्रहार किया है।

इस अवसर पर 31 जनवरी को सेवानिवृत होने वाले अपर महाप्रबंधक अरुण मलिक एवं प्रधान मुख्य बिजली इंजीनियर राज नारायण का अभिनंदन किया गया। संगोष्ठी का संचालन वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी चन्द्र भूषण पाण्डेय तथा धन्यवाद ज्ञापन उप मुख्य राजभाषा अधिकारी शैलेंद्र कुमार सिंह ने किया। संगोष्ठी में प्रधान विभागाध्यक्ष सहित बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

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