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कमिश्नर के तबादले के साथ ही दम तोड़ गया निर्मल हिंडन अभियान

कमिश्नर के तबादले के साथ ही दम तोड़ गया निर्मल हिंडन अभियान
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  • सहारनपुर से नोएडा के बीच तत्कालीन कमिश्नर प्रभात कुमार ने शुरू किया था अभियान

  • विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष

गाजियाबाद । एएनएन (Action News Network)

सरकारी योजनाएं किस तरह बनती हैं और किस तरह से अधर में लटक जाती हैं या दम दौड़ देती हैं। इसका जाता जगता नमूना है निर्मल हिंडन अभियान। मेरठ मंडल के तत्कालीन कमिश्नर प्रभात कुमार के कार्यकाल में शुरू किये गई इस अभियान का अब कोई अता -पता नहीं हैं, यानि कमिश्नर प्रभात कुमार के तबादले के बाद अधिकारियों ने इस अभियान को ठंडे बस्ते में डाल दिया और अब यह अभियान लगभग दम तोड़ चुका है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान सरकार की योजना के हिसाब से हिंडन को निर्मल करने के लिए कार्य किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर वे कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं।

पर्यावरण को बेहतर बनाने के उद्देश्य से सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, शामली, गाजियाबाद व नोएडा के बीच हरनंदी यानि हिंडन नदी को निर्मल करने के लिए वर्ष 2017 में निर्मल हिंडन अभियान शुरू किया गया था। अभियान में हिंडन के तटीय क्षेत्रों को हराभरा करने के लिए सघन पौधरोपण करने, अतिक्रमण से मुक्त करने नदी में प्रदूषित जल का प्रवाह रोकने, कूड़ा-करकट ना डालें जाने को शामिल किया गया था। इसके लिए तत्कालीन कमिश्नर प्रभात कुमार ने इन जिलों के विकास प्राधिकरणों, सिंचाई विभाग, यूपीएसआईडीसी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वन विभाग समेत सभी सरकारी विभागों को अभियान से जोड़ा था।

अभियान की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कमिश्नर खुद सभी विभागों की मीटिंग लेते थे और आये दिन इसकी समीक्षा करते थे। उस दौरान सभी विभाग पूरी ताक़त के साथ एक्टिव हुए और भू गर्भ जल संरक्षण के लिए तालाबों को पुनरोद्धार करने, तटीय क्षेत्रों पर पौधरोपण, नदी की जमीन पर किए गए कब्जों को ध्वस्त करने और हिंडन में कूड़ा डालने वालों पर जुर्माना किया गई। गाजियाबाद में ही 106 तालाबों का चिन्हीकरण कर उनके खुदाई का कार्य शुरू किया गया था। अवैध प्लॉटिंग पूरी तरह से बंद करा दी गयी थी।प्रभात कुमार ने जागरुकता के लिए पदयात्रा भी की थी। सरकारी विभाग, स्वयं सेवी संगठन सभी मिलकर इस अभियान को कामयाबी की और ले ही जा रहे थे कि वर्ष 2018 में प्रभात कुमार का तबादला हो गया और अभियान दम तोड़ गया।

हालांकि शुरू -शुरू में नई कमिश्नर ने इस अभियान को चलाने में रुचि दिखाई, लेकिन धीरे -धीरे अभियान ने तोड़ दिया। आज इस अभियान का कोई पुरसाहाल नहीं है और फिर से अवैध कब्जे के बाद प्लॉटिंग की जा रही है, जो पौधे लगाए गए थे उनके देखभाल भी ठीक से नहीं हो पर रही है। साथ ही हिंडन नदी में आज भी कई स्थानों पर नालों के जरिये दूषित जल का बेरोक -टोक किया जा रहा है।कमिश्नर प्रभात द्वारा गठित समिति के सदस्य व हिंडन जल बिरादरी के संयोजक विक्रांत शर्मा बताते हैं कि उनके तबादले के बाद अभियान बंद हो गया है। हिंडन की स्थित पूर्व की भांति हो गयी है जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी उत्सव शर्मा का कहना है कि इस अभियान की मॉनिटरिंग मेरठ कार्यालय द्वारा की जाती है, ज्यादा जानकारी वहीं से मिल सकेगी जहां तक गाजियाबाद का सवाल है तो यहां हिंडन को निर्मल रखने के लिए कार्य किए जा रहे हैं।

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