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पूर्व राष्ट्रपति ओबामा ने विरोध प्रदर्शन में हिंसा की निंदा की

पूर्व राष्ट्रपति ओबामा ने विरोध प्रदर्शन में हिंसा की निंदा की
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नई दिल्ली । एएनएन (Action News Network)

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सोमवार को नस्लीय असमानताओं और अत्यधिक पुलिस बल प्रयोग पर राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों में हिंसा की निंदा की,जबकि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के कार्यों की प्रशंसा की।

ओबामा ने एक ऑनलाइन निबंध में लिखा कि प्रदर्शनकारियों के विशाल प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे हैं। लेकिन कुछ "छोटे अल्पसंख्यक समूह" लोगों को जोखिम में डाल रहे थे और उन समुदायों को नुकसान पहुंचा रहे थे, जिनकी मदद करने के इरादे से विरोध किया जा रहा है।

रिपब्लिकन डोनाल्ड ट्रम्प से पहले एक डेमोक्रेट ओबामा दो बार राष्ट्रपति रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि हिंसा "पड़ोस का विनाश करती है। जहां अक्सर सेवाओं और निवेश की पहले ही कमी होती है और बड़े उद्देश्य से भटकाती है।"

ओबामा की नवीनतम टिप्पणी फ्लॉयड मामले पर उनकी पहली टिप्पणी के तीन दिन बाद आई जिसमें न्याय की मांग की गई थी लेकिन कुछ विरोध प्रदर्शनों की हिंसक प्रकृति का उल्लेख नहीं किया गया था।

ओबामा के कार्यकाल में उप राष्ट्रपति के रूप में कार्य कर चुके और 3 नवंबर के आगामी चुनाव में ट्रम्प का सामना करने जा रहे राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बिडेन ने भी रविवार को हिंसा को समाप्त करने का आह्वान किया।

बिडेन ने एक बयान में कहा, "इस तरह की क्रूरता का विरोध करना सही और आवश्यक है। लेकिन आगजनी और अनावश्यक विनाश सही नहीं है।"

2017 में पद छोड़ने के बाद से राजनीति से बहुत हद तक बचते रहे ओबामा ने हाल ही में ट्रम्प के कोरोनावायरस महामारी से निपटने के तरीके की आलोचना की है। पहले अश्वेत अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में ओबामा फर्ग्यूसन, मिसौरी और बाल्टीमोर जैसे शहरों में नागरिक अशांति से निपट चुके हैं जहां पुलिस के हाथों युवा अश्वेत पुरुषों की मौत पर विरोध प्रदर्शन व्यापक और कभी-कभी हिंसक भी हो गए थे।

ओबामा के न्याय विभाग ने पुलिस में आंतरिक सुधारों में तेजी लाने के प्रयास में उन शहरों और शिकागो जैसे शहरों के पुलिस विभागों में जांच शुरू की। ट्रम्प प्रशासन ने ऐसे काम बहुत कम किये हैं। अपने निबंध में ओबामा ने प्रदर्शनकारियों से राजनीति के बारे में निंदक नहीं होने का आग्रह किया। उन्होंने यह तर्क दिया कि राष्ट्रीय और स्थानीय स्तरों पर नए नेताओं को चुनने से बदलाव आएगा।

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