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दो महीने हो गए, ग्राहकों की कमी से अभी भी जूझ रहे दिल्ली के रेस्टोरेंट

दो महीने हो गए, ग्राहकों की कमी से अभी भी जूझ रहे दिल्ली के रेस्टोरेंट
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नई दिल्ली । Action India News

कोरोना संक्रमण काल से पहले, दिन ढलते ही दक्षिणी दिल्ली के कुछ प्रमुख मार्केट में गतिविधियां तेज हो जाती थीं। डिफेंस कॉलोनी, लाजपत नगर, न्यू-फ्रेंड्स कॉलोनी और ग्रेटर कैलाश मार्केट के रेस्टोरेंट (भोजनालय या जलपान गृह) ग्राहकों से सजे रहते थे। कार पार्किंग में तिल रखने की जगह नहीं होती थी, लेकिन आज ऐसा नहीं है। कोरोना ने सब कुछ बदल दिया है। दिल्ली में रेस्टोरेंट खुले करीब दो महीने हो चुके हैं, लेकिन पहले के मुकाबले अभी आधे ग्राहक भी नहीं आ रहे हैं।

केंद्र सरकार की अनलॉक-1 घोषणा के साथ ही दिल्ली सरकार ने 8 जून को शर्तों के साथ भोजनालय और जलपान गृह को खोलने की इजाजत दी थी। दो महीने हो गए, लेकिन अभी भी अधिकतर रेस्टोरेंट के मालिक ग्राहकों की कमी से जूझ रहे हैं। हालांकि उनकी उम्मीद अभी भी बरकरार है कि अच्छे दिन फिर आएंगे।

दक्षिणी दिल्ली न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित ग्रांडले मार्केट में चावला चिकन कार्नर के मालिक जगन चावला ने हिन्दुस्थान समाचार को बताया, "पहले के मुकाबले अभी आधे से भी कम ग्राहक रह गए हैं, लेकिन धीमे-धीमे ग्राहकों की संख्या बढ़ रही है। कोरोना महामारी के बीच अनलॉक-1 के तहत जब रेस्टोरेंट खोले गए थे तो सिटिंग नहीं थी, लेकिन अब सिटिंग भी शुरू हो गयी है। मेरे पास 10-12 लोग काम करते थे, अब चार-पांच ही काम पर रह गए हैं।

कोरोना काल में नास्ता, भोजन और रहने के इंतज़ाम के साथ-साथ, मैंने अपने कामगारों को दो-तीन महीने का वेतन बिना कार्य ही दिया था। मेरी तो अपनी दुकान है तो चल रहा है, लेकिन जिनकी किराए की दुकान है, उनके लिए बड़ी मुसीबत है। यहां दुकान का किराया लाख रुपये महीना है। उम्मीद है कि धीरे-धीरे ग्राहकों की संख्या बढ़ेगी और शायद एक-दो महीने में हालात सामान्य हो जाएंगे।"

चावला रेस्टोरेंट पर अपने मित्रों के साथ तंदूरी रोटी और चिकन करी का स्वाद ले रहे मनोज कंधारी ने हिन्दुस्थान समाचार को बताया, "मैं अक्सर अपने दोस्तों के साथ यहां खाना खाने आता था, लेकिन जब से कोरोना महामारी आई है उसके बाद पहली बार रेस्टोरेंट में खाना खाने आया हूं। इतने दिनों बाद घर से बाहर खाने निकला हूं तो अच्छा लग रहा है। यहां अभी पहले जैसी रौनक नहीं है।"

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