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एनआरसी के जरिए असमिया को पहचान मिलेगी : प्रो महंत

एनआरसी के जरिए असमिया को पहचान मिलेगी : प्रो महंत
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गुवाहाटी। एक्शन इंडिया न्यूज़

प्रोफेसर ननी गोपाल महंत ने कहा है कि राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के जरिए किसी भी प्रकार का धार्मिक भेदभाव उत्पन्न नहीं होगा बल्कि इससे लोगों को असमिया होने की पहचान मिल सकेगी।

ये बातें उन्होंने मंगलवार को राजधानी के पंजाबारी स्थित श्रीमंत शंकरदेव कालाक्षेत्र के प्रेक्षागृह में आयोजित अपने नव लिखित पुस्तक 'सिटिजनशिप डिबेट ओवर एनआरसी एंड सीएए : असम और इतिहास की राजनीति' के विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए कही।


समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ मोहन राव भागवत ने पुस्तक का विमोचन किया। इस मौके पर असम के मुख्यमंत्री डॉ हिमंत बिस्व सरमा, गौहाटी विश्वविद्यलाय के कुलपति पीजे हैंडिक, राज्य के कई विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर, प्रोफेसर, असम सरकार के कई मंत्री, विधायक, वरिष्ठ अधिकारी एवं जाने माने गण्यमान्य मौजूद थे।


गौहाटी विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो. ननी गोपाल महंत ने अपनी पुस्तक पर प्रकाश डालने से पहले अंबिकागिरी राय चौधरी जैसे बड़े-बड़े महापुरुषों के कथन भी उद्धृत किए। उन्होंने कहा कि एनआरसी तथा नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए को लेकर व्याप्त भ्रम को दूर करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि सीएए के जरिए किसी भी व्यक्ति की नागरिकता ली नहीं जाएगी बल्कि देश में रह रहे लोगों को नागरिकता दी जाएगी।


प्रो. महंत ने अपनी पुस्तक में असम में बंगाली मुसलमानों के अनुप्रवेश तथा बंगाली हिन्दुओं के शरणार्थी और रिफ्यूजी के रूप में चार चरणों में बात कही है। अपने संक्षिप्त तथा सारगर्भित भाषण में प्रो. महंत ने असम में अनुप्रवेश की वजह से स्थानीय संस्कृति पर खतरे पर व्यापक रूप से प्रकाश डाला।


उन्होंने बताया कि किस प्रकार बांग्लादेशी मूल के मुसलमान आजादी से पहले से ही असम में अवैध रूप से बस कर इसे पाकिस्तान बनाने की कोशिश में लगे रहे हैं। अपने संबोधन में उन्होंने तमाम स्थिति पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस पुस्तक को पढ़े।

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