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यह उम्मीदों के पूरा होने और राष्ट्रीय संकल्पों की सिद्धि के लिए प्रेरणा लेने का अवसरः प्रधानमंत्री मोदी

यह उम्मीदों के पूरा होने और राष्ट्रीय संकल्पों की सिद्धि के लिए प्रेरणा लेने का अवसरः प्रधानमंत्री मोदी
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शिवसागर (असम)। एक्शन इंडिया न्यूज़

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को यहां ऐतिहासिक जेरेंगा पथार (मैदान) में असम सरकार के भूमिहीनों को जमीन का स्वामित्व प्रदान करने के कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि शिवसागर को देश के पांच सबसे महत्व के आईकॉनिक आर्किलॉजिकल साइड में शामिल किया गया है। इस मौके पर उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती को याद करते हुए कहा कि देश इस दिन को पराक्रम दिवस के रूप में मना रहा है। आज का दिन उम्मीदों के पूरा होने के साथ ही राष्ट्रीय संकल्पों की सिद्धि के लिए प्रेरणा लेने का भी अवसर है। उन्होंने असम के महान संतान भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका के भूमि को लेकर कहे गए शब्दों का असमिया भाषा में उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि असम के करीब 6 लाख मूलनिवासी परिवार ऐसे थे जिनके पास जमीन के कानूनी कागज नहीं थे। इसकी चिंता सर्वानंद सोनोवाल सरकार ने की। असम के मूल निवासियों की भाषा, संस्कृति के संरक्षण, भूमि से जुड़े अधिकार के लिए 2019 में नई लैंड पॉलिसी बनाई गई। गत वर्षों में सवा दो लाख से ज्यादा मूलनिवासी परिवारों को भूमि के पट्टे सौंपे जा चुके हैं। इसमें एक लाख और जुड़ गए। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का इन परिवारों को सीधे लाभ मिलेगा। पीएम किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड, फसल बीमा योजना व बैंकों से आसानी से ऋण मिल पाएगा।

उन्होंने कहा कि असम की लगभग 70 छोटी-बड़ी जनजातियों को सामाजिक संरक्षण मिला है। अटल सरकार हो या फिर बीते कुछ सालों से केंद्र और राज्य की की सरकार असम की संस्कृति, स्वाभिमान और सुरक्षा, असमिया भाषा और साहित्य को प्रोत्साहित करने के लिए भी अनेक कदम उठाए गए हैं। श्रीमंत शंकरदेव जी के दर्शन, उनकी शिक्षा, असम के साथ-साथ संपूर्ण देश में पहुंचाने का कार्य हो रहा है। भटद्रवा सत्र समेत दूसरे सत्रों को बचाने के लिए, आस्था और आध्यात्मिक स्थानों को भव्य बनाने के लिए, कला से जुड़े स्थानों को भव्य बनाने के लिए, काजीरंगा नेशनल पार्क को अतिक्रमण से मुक्त करने करने के लिए तेजी से काम हुए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लिए, नार्थ ईस्ट का तेज विकास हुआ है। आत्मनिर्भर असम का रास्ता असम के लोगों के आत्मविश्वास से होकर गुजरता है। असम में लगभग पौने दो करोड़ गरीबों के जनधन खाते खोले गए। इन खातों के कारण कोरोना के समय हजारों बहनों और लाखों किसानों के बैंक खाते में सीधी मदद भेजना संभव हो पाया। असम की लगभग 40 फीसद आबादी आयुष्मान भारत की लाभार्थी है, जिसमें से लगभग डेढ़ लाख साथियों को मुफ्त इलाज भी मिल चुका है। बीते 6 सालों में असम में टॉयलेट की कवरेज 38 फीसद से बढ़कर 100 फीसद, 50 फीसद से बढ़कर 100 फीसद घरों तक बिजली पहुंच चुकी है। जल जीवन मिशन के तहत बीते डेढ़ साल में ढाई लाख से ज्यादा घरों में पानी का कनेक्शन दिए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार तीन-चार वर्षों में असम के हर घर तक पाइप से जल पहुंचाने के लिए काम कर रही है। आज असम की 35 लाख बहनों की रसोई में उज्ज्वला का गैस कनेक्शन है। इनमें भी लगभग 4 लाख परिवार एससी और एसटी वर्ग के हैं। 2014 तक असम में एलपीजी कवरेज सिर्फ 40 फीसद था। अब 99 फीसद हो गया है। सरकार ने डिस्ट्रीब्यूटर की संख्या को 330 से बढ़ाकर 575 से भी ज्यादा कर दिया है। असम में 50 लाख से ज्यादा मुफ्त गैस सिलेंडर उज्जवला के लाभार्थियों कोरोना के दौरान दिए गए।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि चाय जनजाति के लोगों को घर और शौचालय जैसी मूल सुविधा, चाय जनजाति के अनेक परिवारों को जमीन का कानूनी अधिकार व उनके बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की सुविधा, बैंक की सुविधाओं से जोड़ने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चाय श्रमिक नेता संतोष टोप्नो सहित चाय जनजाति के दूसरे बड़े नेताओं की प्रतिमाएं लगाई गई हैं। उन्होंने गत 6 सालों में असम सहित पूरे पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर में विकास, एक्ट ईस्ट पॉलिसी से मिलने वाले लाभ, पूर्वी एशियाई देशों से कनेक्ट बढ़ने, असम के गांव में करीब 11,000 किलोमीटर की सड़कों का निर्माण, डॉ भूपेन हजारिका सेतु, बोगीबील ब्रिज, सराईघाट ब्रिज का जिक्र करते हुए कनेक्टिविटी पर प्रकाश डाला। इसके अलावा जल मार्गों से बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और म्यांमार से जुड़ने, रेल और एयर कनेक्टिविटी का दायरा बढ़ने, लॉजिस्टिक, एलजीबीआई हवाई अड्डे पर आधुनिक टर्मिनल और कस्टम क्लीयरेंस सेंटर का निर्माण, रूपसी एयरपोर्ट का आधुनिकीकरण, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब जैसी सुविधाओं से औद्योगिक विकास पर प्रकाश डाला।

उन्होंने गैस आधारित अर्थव्यवस्था, असम में तेल और गैस से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर बीते वर्षों में 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश, गुवाहाटी-बरौनी गैस पाइपलाइन, नुमालीगढ़ रिफायनरी के विस्तारीकरण, बॉयोरिफायनरी की सुविधा, एम्स एवं इंडियन एग्रिकल्चर इंस्टीट्यूट संस्थान को राज्य के लिए वरदान बताया। उन्होंने असम में कोरोना को बेहतर तरीके से हैंडल सोनोवाल, हिमंत और उनकी टीम को बधाई दी। राज्यवासियों कोरोना टीका जरूर लगवाने का आह्वान किया। पूरी दुनिया में भारत में बने टीके की डिमांड का जिक्र किया।


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