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फर्रुखाबाद : शीत लहर ने आलू किसानों का किया बेड़ा गर्क,आलू में लगा झुलसा, सरसों चाट गई माहूं...

फर्रुखाबाद : शीत लहर ने आलू किसानों का किया बेड़ा गर्क,आलू में लगा झुलसा, सरसों चाट गई माहूं...
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फर्रुखाबाद। एक्शन इंडिया न्यूज़

यहां चल रही बर्फ भरी हवाओं ने किसानों के सामने और समस्या पैदा कर दी है। इस शीत लहर से जहां जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है, वही आलू किसानों के माथे पर चिंता की रेखाएं उभर आई है। कई दिन से पड़ रहे घने कोहरा और आसमान में छाए बादल की वजह से आलू और सरसों में रोग लग गया है। जिससे किसान पूरी तरह से परेशान नजर आ रहा है। वैसे भी किसानों के सामने आलू पर छाई मंदी की विकराल समस्या बनी हुई थी।

एकाएक चली शीतलहर की वजह से यहां किसानों के सामने कोढ़ में खाज वाली कहावत चरितार्थ हो गई है। प्रगतिशील किसान नारद सिंह कश्यप का कहना है कि आलू मै इस समय झुलसा रोग लग गया है। झुलसा रोग लग जाने से आलू की बेल धीरे-धीरे पूरी तरह से जल जाती है और पैदावार न के बराबर रह जाती है। आसमान में छाए बादल और घने कोहरे की वजह से आलू के खेतों में नमी दौड़ गई है जिससे आलू में झुलसा रोग की शुरुआत हो गई है धूप निकलते ही आलू की बेल खेतों में ही झुलस जाएगी। इसका आलू की पैदावार पर बहुत गहरा असर पड़ेगा।

प्रगतिशील किसान नारद सिंह कश्यप का कहना है कि आलू पर छाई मंदी की वजह से किसान वैसे भी खून के आंसू रो रहा था। लेकिन आलू में झुलसा रोग लगने से अन्नदाता के सामने अब आत्महत्या के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं बचेगा। किसान का कहना है कि किसानों ने 4000 रुपये प्रति कुंतल आलू खरीद कर अपने खेतों में बोया था और मौजूदा समय में 400 रुपये कुंतल आलू बिक रहा है। मौजूदा समय में आलू के जो भाव चल रहे हैं उनसे किसानों की लागत नहीं निकल रही है। लागत का पैसा किसानों की जेब से जा रहा है।

दूसरी तरफ सरसों की फसल में माहूं रोग लग जाने की वजह से फसल न के बराबर पैदा होने की संभावना रह गई है। किसान हर तरह से परेशान नजर आ रहा है। किसानों की समस्या कुदरत ने और दूनी कर दी है। एक तो भाव का मारा किसान खून के आंसू रो रहा था, इसी दौरान व्हली शीतलहर की वजह से अन्नदाता अब पूरी तरह से परेशान हो गया है। कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर जगदीश किशोर का कहना है कि झुलसा रोग बहुत ही खतरनाक रोग है ।इसके बचाव के लिए किसानों को अपने खेतों की मेड़ पर आग जलानी चाहिए और झुलसा रोग नाशक दवाइयों का छिड़काव करना चाहिए। किसानों को इस समय खेतों की चारों तरफ आग जलानी जरूरी होती है। दवाइयों का छिड़काव कर दिया जाए तो झुलसा का असर खेतों में कम होता है।


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