Action India
बिहार

सोचिए और निर्णय लीजिए, आर्यन के आगे फीका पर गया देश के लिए शहादत

सोचिए और निर्णय लीजिए, आर्यन के आगे फीका पर गया देश के लिए शहादत
X

बेगूसराय। एक्शन इंडिया न्यूज़

भारत माता को ब्रिटिश दासता से मुक्त कराने के लिए मात्र 24 साल की उम्र में हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल जाने वाले सरदार भगत सिंह को भला कौन भूल सकता है। आज ही नहीं, भविष्य के भी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की विश्व में होने वाले चर्चा में भगत सिंह याद करते जाते रहेंगे। आज भी जिस तरह से भारत के सीमा में नापाक हरकत करने वाली विदेशी ताकतों से बचाने के लिए हमारे भारतीय सेना के जवान अपनी शहादत देते रहते हैं लेकिन कश्मीर में लाइन ऑफ कंट्रोल के समीप माइंस विस्फोट में लेफ्टिनेंट ऋषि कुमार की हुई मौत को मीडिया के एक वर्ग ने आर्यन में उलझा रखा तो इस पर चर्चा भी होने लगी है। बात देश के लिए बड़ा शहादत या ड्रग्स, कॉर्पोरेट रंग बिरंगी दुनिया ही सब कुछ है या कुछ सामाजिक सरोकार भी।

लोग कहते हैं कि ऋषि कुमार बिहार के बेगूसराय निवासी (मूल निवासी लखीसराय) ऋषि कुमार ने मात्र 23 वर्ष की उम्र में भारत माता की रक्षा करते आतंकी वारदात में अपनी जान दे दी। राष्ट्रीय स्तर के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए होनी चाहिए कि एक मां-बाप अपने पुत्र की शहादत के बाद एक-एक पल के घटनाक्रम पर नजर बना रहे थे। लोग बार-बार टीवी खोल कर, चैनल बदलकर देख रहे थे, लेकिन कहीं कोई जानकारी नहीं। सब जगह, देश की सभी मीडिया हाउस के सभी लोग मुंबई में ड्रग्स मामले के आरोपी आर्यन की ओर थे, कहां उठे कब पानी पिए पर पल-पल नजर रखी जा रही थी।

इधर शहीद के परिवार, गांव-समाज और जिला में लोग परेशान, वह तो भला हो सोशल मीडिया का जिसने कुछ जानकारी देने का प्रयास किया, परिजन लगातार अपडेट लेते रहे। हालांकि पार्थिव शरीर पटना जाने के बाद मीडिया कर्मियों ने तत्परता दिखाई। स्थानीय स्तर पर राष्ट्रीय-लोकल न्यूज चैनल, अखबारों, समेत तमाम मीडिया कर्मियों ने शहीद लेफ्टिनेंट ऋषि के ऐतिहासिक अंतिम यात्रा को भरपूर कवरेज दिया है। लेकिन कहीं ना कहीं दिखी बड़ी गैप चर्चा को जन्म दे चुकी है।

Next Story
Share it