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प्रधानमंत्री के विजन से संवर रहे हैं गांव और पर्यावरण, ग्रीन टेक्नोलॉजी से बन रहे सड़क : गिरिराज सिंह

प्रधानमंत्री के विजन से संवर रहे हैं गांव और पर्यावरण, ग्रीन टेक्नोलॉजी से बन रहे सड़क : गिरिराज सिंह
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बेगूसराय। एक्शन इंडिया न्यूज़


केंद्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत गांव और पर्यावरण साथ-साथ संवर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री विजन के तहत गांवों में कनेक्टिविटी के विकास में अग्रसर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से करीब 60 हजार किलोमीटर का निर्माण कार्य ग्रीन टेक्नॉलाजी से किया जा चुका है। नरेंद्र मोदी की सरकार ने ग्रामीण भारत की सड़कों पर बड़ा निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना फेज-एक, दो, तीन और आरसीपीएलडब्लूईए को जारी रखने तथा शेष कार्यों को पूरा करने की मंजूरी दी गई। 2021-22 से 2024-25 तक एक लाख 12 हजार 419 करोड़ रुपया खर्च किया जाएगा। हरित प्रौद्योगिकी और मॉडर्न टेक्नॉलजी के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा। जनजातीय समुदायों की एक सौ से अधिक जनसंख्या वाली एक लाख 84 हजार 444 बस्तियों में से शेष केवल दो हजार 432 बस्तियां का कार्य अब पूरा किया जाएगा। नौ राज्यों के 44 वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में शेष पांच हजार 714 किलोमीटर लंबी सड़कों और 358 पुलों का कार्य पूरा किया जाएगा। आरसीपीएलडब्लूईए के तहत अन्य एक हजार 887 किलोमीटर लंबी सड़कों तथा 40 पुलों को मंजूरी और समय सीमा को मार्च 2023 तक बढ़ाया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना फेज-एक के तहत शेष 20 हजार 950 किलोमीटर लंबी सड़कों और एक हजार 974 पुलों के कार्यो को भी पूरा किया जाएगा। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना फेज-दो के तहत शेष चार हजार 240 किलोमीटर लंबी सड़कों और 254 पुलों के कार्य को भी पूरा किया जाएगा। उत्तर-पूर्व और पर्वतीय राज्यों में शेष कार्यो को पूरा करने में मदद करने के लिए समय सीमा को सितंबर 2022 तक बढ़ाया गया है।

गिरिराज सिंह ने कहा है कि ग्रामीणों को अपनी जमीन का मालिकाना हक दिलाने का कार्य स्वामित्व योजना तेजी से कार्यरत है। 57 हजार से ज्यादा गांवों में हो चुका है, नक्शा का कम पूर्ण और 79 हजार से ज्यादा गांवों में चूना मार्किंग एवं ड्रोन सर्वे हो चुका है। अपनी गाय, अपना खेत, अपना खाद के संकल्प को पूरा करने के उद्देश्य से महिलाओं के बीच गोबर, फ्लाई ऐश और संसाधित चाय अपशिष्ट से जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया जा रहा है। सही मायने में यह उर्वरक किसानों को आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास देने में कारगर साबित होगा। बेगूसराय के वनद्वार गांव में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को किसानी और जैविक खाद बनाने की विधि सिखाने और अलग-अलग खेती से अवगत कराने के लिए कार्यशाला आयोजित किया गया है। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के बीच उच्च गुणवत्ता वाला मालभोग केले का पौधा वितरित किया गया, यह पौधा किसानों की आय में समृद्धि लाएगा और कम लागत पर मुनाफा बढ़ाने में सहायक होगा।

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