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गुजरात

हाई कोर्ट ने गुजरात मद्य निषेध कानून के खिलाफ याचिकाओं को बताया विचार योग्य

हाई कोर्ट ने गुजरात मद्य निषेध कानून के खिलाफ याचिकाओं को बताया विचार योग्य
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अहमदाबाद। एक्शन इंडिया न्यूज़

गुजरात हाई कोर्ट ने राज्य में शराब के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगाने वाले गुजरात मद्य निषेध कानून1949 के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को विचार योग्य बताया। वहीं महाधिवक्ता ने इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का संकेत दिया है।

सोमवार को गुजरात हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति बीरेन वैष्णव की पीठ ने कहा कि याचिकाओं को ''विचार योग्य और गुण-दोष के आधार पर सुनवाई'' के लिए और अंतिम सुनवाई के लिए 12 अक्टूबर तय किया गया है। पीठ ने याचिकाओं के कोर्ट में टिकने के संबंध में राज्य सरकार की प्रारंभिक आपत्तियों को खारिज कर दिया।

इस संबंध में महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी ने हाई कोर्ट के समक्ष संकेत दिया कि सरकार आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला कर सकती है। इस मामले में सरकार का मत है कि किसी भी कानून, नए कानून या अतिरिक्त प्रावधान की वैधता पर गौर करने का अधिकार किसी कोर्ट को नहीं है।

दरअसल, हाई कोर्ट में कई याचिकाओं के माध्यम से गुजरात निषेध कानून 1949 के तहत शराब के उत्पादन, खरीद, परिवहन, आयात व निर्यात, बिक्री, और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध की धाराओं की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि इस मामले को गुण-दोष के आधार पर लिया जाना चाहिए, क्योंकि दलीलों में जिन प्रावधानों को चुनौती दी गयी है, वे 1951 में किए गए प्रावधानों से अलग हैं, क्योंकि उनमें बाद के वर्षों में संशोधन किया गया है।

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