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झारखंड

घर-घर बैंकिंग सेवाएं पहुंचा रहीं बीसी सखियां

घर-घर बैंकिंग सेवाएं पहुंचा रहीं बीसी सखियां
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रांची। एक्शन इंडिया न्यूज़

आकांक्षी जिले में शामिल खूंटी के रानियां प्रखंड के जयपुर गांव की दिव्यांग प्रफुलित कंडुलना अब घर बैठे ही सरकारी पेंशन का लाभ उठा रही है। कुछ समय पहले तक पेंशन के लिये उसे चार-पांच महीने में एक बार कई परेशानियों से जूझते हुए बैंक के चक्कर लगाने पड़ते थे।

यह संभव हुआ है राज्य सरकार की बैंकिंग सखी कोरोस्पोंडेंट या यूं कहें कि बीसी सखी की वजह से।

प्रफुलित कंडुलना बताती है कि बीसी सखी गायत्री तो देवदूत बनकर मेरे जीवन आई।

अब मैं घर बैठे पेंशन के पैसे उनसे ले सकती हूं। वर्तमान में गायत्री जैसी करीब 3300 सखी मंडल की बहनें अपने गांव-पंचायत में बैंकिंग सखी कॉरेस्पॉन्डेंट के रूप में डोरस्टेप बैंकिंग सुविधाएं पहुंचा रही हैं।

  • रंग ला रही सरकार की मुहिम

राज्य के ग्रामीण इलाकों में बैकिंग सुविधाओं को हर घर तक पहुंचाने की मुहिम रंग ला रही है।

बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट सखी (बीसी सखी) अपने गांव पंचायत में बैंकिंग सुविधाओं को सुलभ बनाने की जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही हैं। ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत झारखण्ड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के जरिए विभिन्न बैंकों के साथ साझेदारी में बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट सखी को राज्य के ग्रामीण इलाकों में पदस्थापित किया गया है।

राज्य सरकार सखी मंडल की बहनों को चयनित एवं प्रशिक्षित कर रही है।

इस पहल से सुदूर ग्रामीण इलाकों में जहां बैंक की पहुंच नहीं हैं, वहां के लोगों को अब बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट सखी के माध्यम से बैंकिग सुविधाएं मिलने लगी हैं।

साथ ही सखी मंडल की बहनों को भी रोजगार मिला है। इससे उनकी 6 से 12 हजार रुपये तक की मासिक आमदनी हो रही है।

रांची के ओरमांझी प्रखण्ड की सोनी देवी सखी मंडल की एक सक्रिय सदस्य है और वो करीब दो साल से बीसी सखी के रूप में गांवों को बैंकिग सेवाएं दे रही है।

ग्राहकों के बढ़ते तादाद को देखते हुए हाल ही में सोनी देवी ने अपना बैंकिंग सेवा केंद्र भी खोला है। सोनी देवी अब रोजाना 40 से 50 लोगों को बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ती है।

सकारात्मक ऊर्जा से लबरेज सोनी देवी कहती हैं कि वे बीसी सखी के रूप में हर महीने करीब 25 लाख रुपये का लेन-देन करती हैं।

इससे एक ओर उन्हें करीब 8 हजार की आमदनी हो जाती है वहीं, उन्हें इस बात की खुशी है कि बुजर्गों को वे उनके घर जाकर पेंशन उपलब्ध करा रही हैं।

ओरमांझी स्थित गगारी गांव की बिपति देवी (80 ) कहती हैं कि मैं अब चलने-फिरने में सक्षम नहीं हूं लेकिन घर बैठे ही बीसी सखी के माध्यम से बैंकिंग सेवाएं आसानी से प्राप्त हो जाती हैं। वृद्धा पेंशन समय-समय पर बीसी सखी आकर उपलब्ध करा देती है।

इससे पहले निकासी के लिए बैंक जाना पड़ता था तो काफी परेशानी होती थी।

  • लगभग एक अरब का लेन-देन हो रहा सुनिश्चित

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत सखी मंडल की दीदियों को प्रशिक्षित कर बीसी सखी के रूप में स्वरोजगार व रोजगार से जोड़ा जा रहा है।

सखी मंडल की बहनें अपने गांव-पंचायत में बैंकिंग सखी कॉरेस्पॉन्डेंट के रूप में डोरस्टेप बैंकिंग सुविधाएं पहुंचा रही है। इनके द्वारा मनरेगा मजदूर, पेंशन, बैंक खाता, छात्रवृति, सरकारी योजनाओं की राशि का भुगतान एवं समूहों के लेन-देन के कार्य किया जा रहा है।

बैंक वाली दीदियां अब हर महीने राज्य के गांव-पंचायत में रहने वाले करीब 2.5 लाख लोगों तक बैंकिग सुविधाएं पहुंचा रही है।

इससे तकरीबन 90 से 100 करोड़ रुपये का लेन-देन सुनिश्चित हो रहा है। बीसी सखी अपने लैपटॉप एवं पीओएस मशीन के जरिए गांव तक बैंक में मिलने वाली हर सुविधा से लोगों को आच्छादित कर रहीं हैं।

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